जयपुर/बीकानेर। राजस्थान में पेयजल आपूर्ति को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी पहल के तहत ब्राह्मणी नदी से बीसलपुर बांध तक जल परिवहन परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को अंतिम रूप दे दिया गया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के पूरा होने पर राज्य के कई जिलों में पेयजल संकट को काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी।
करीब 7893 करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत ब्राह्मणी नदी के भैंसरोड़गढ़ क्षेत्र से पानी को लगभग 125 किलोमीटर दूर बनास नदी तक पहुंचाया जाएगा, जहां से यह पानी बीसलपुर बांध में संग्रहित किया जाएगा। अनुमान है कि मानसून के दौरान लगभग 680 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) अतिरिक्त पानी बीसलपुर तक पहुंच सकेगा, जो बांध की कुल क्षमता का लगभग 62 प्रतिशत है।
परियोजना के पूर्ण होने के बाद जयपुर, अजमेर, टोंक, दौसा और सवाई माधोपुर सहित कई जिलों की पेयजल आपूर्ति व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी। यह योजना भविष्य में बढ़ती जल मांग को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2045 तक की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक मानी जा रही है।
योजना के तहत ब्राह्मणी नदी पर एक बैराज का निर्माण प्रस्तावित है, जिसकी क्षमता लगभग 54 मिलियन क्यूबिक मीटर होगी। इसके साथ ही पानी को सुरक्षित और प्रभावी तरीके से स्थानांतरित करने के लिए चैनल और सुरंग (टनल) निर्माण भी शामिल है।
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परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पर्यावरणीय दृष्टिकोण से संवेदनशील क्षेत्रों से होकर गुजरता है। इसमें भैंसरोड़गढ़ वन्यजीव अभयारण्य, मुकुंदरा टाइगर रिजर्व और रामगढ़ विषधारी वन्यजीव अभयारण्य शामिल हैं। इन क्षेत्रों में पारिस्थितिकीय प्रभाव को कम करने के लिए लगभग 32 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाने का प्रस्ताव है।
मानसून के दौरान ब्राह्मणी नदी में बहकर चंबल और आगे समुद्र की ओर जाने वाले अतिरिक्त जल को उपयोग में लाने के लिए लगभग 4800 क्यूसेक पानी को संरक्षित करने की योजना है। इसके माध्यम से जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
इस परियोजना से पेयजल सुरक्षा के साथ-साथ सिंचाई सुविधाओं में भी सुधार की उम्मीद है। इससे कृषि उत्पादन बढ़ने और किसानों की आय में वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही निर्माण और रखरखाव कार्यों के दौरान रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना पूर्वी राजस्थान के जल प्रबंधन ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और लंबे समय से चले आ रहे जल संकट के समाधान की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।
