राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (राजुवास) में मंगलवार को स्नातकोत्तर परिषद् की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों, पाठ्यक्रमों और आगामी प्री-पीजी परीक्षा को लेकर कई अहम बिंदुओं पर चर्चा की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने कहा कि विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली में छात्र हित सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने निर्धारित समयावधि में पाठ्यक्रम पूर्ण कराने और विद्यार्थियों को कौशल आधारित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय लगातार आधुनिक और रोजगारोन्मुख शिक्षण प्रणाली को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रहा है।
अधिष्ठाता स्नातकोत्तर अध्ययन प्रो. राजेश कुमार धूडिया ने परिषद् के विभिन्न एजेंडों की जानकारी देते हुए बताया कि पीजी एवं पीएचडी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए 12 जुलाई को प्री-पीजी परीक्षा आयोजित की जाएगी। उन्होंने बताया कि राजुवास के संघटक वेटरनरी महाविद्यालय बीकानेर और उदयपुर के साथ-साथ रूवास जयपुर के पीजीआईवीईआर महाविद्यालय में प्रवेश इसी परीक्षा के माध्यम से होंगे।
बैठक में प्री-पीजी परीक्षा से संबंधित विषयवार पाठ्यक्रम, अभ्यर्थियों की पात्रता, सीटों के वर्गीकरण और काउंसिलिंग कार्यक्रम पर विस्तार से चर्चा कर अनुमोदन दिया गया। इसके अलावा विभिन्न विषयों के शैक्षणिक अभिलेखों में नाम संशोधन संबंधी प्रस्ताव भी परिषद् के समक्ष प्रस्तुत किए गए।
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परिषद् सदस्य एवं पूर्व निदेशक क्लीनिक प्रो. टी.के. गहलोत ने विश्वविद्यालय में नए सर्टिफिकेट और पीजी डिप्लोमा कार्यक्रम शुरू करने का सुझाव दिया। वहीं प्रो. बी.के. माथुर ने स्नातकोत्तर शिक्षण को और अधिक प्रभावी और उपयोगी बनाने के लिए अपने सुझाव रखे।
बैठक में अधिष्ठाता वेटरनरी महाविद्यालय बीकानेर प्रो. बी.एन. श्रृंगी, अधिष्ठाता वेटरनरी महाविद्यालय उदयपुर प्रो. एस.के. शर्मा, डेयरी महाविद्यालय बीकानेर के अधिष्ठाता प्रो. राहुल सिंह पाल, निदेशक क्लीनिक प्रो. प्रवीण बिश्नोई, परीक्षा नियंत्रक डॉ. सुनीता पारीक सहित कई परिषद् सदस्य उपस्थित रहे।
