बीकानेर। राजस्थान के बीकानेर की पोक्सो अदालत (संख्या 2) ने मानवता को शर्मसार करने वाले एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। पीठासीन अधिकारी डॉ. मनीषा चौधरी ने 14 वर्षीय किशोरी के साथ दुष्कर्म करने वाले दोषी को 20 साल के कठोर कारावास और 1.20 लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
घटना का विवरण: यह मामला 6 साल पहले नोखा क्षेत्र के एक गाँव का है। 12 जनवरी 2020 को जब पीड़िता के माता-पिता काम पर गए थे, तब पड़ोस में रहने वाले युवक ने मौका पाकर घर में प्रवेश किया। उसने पीड़िता के 7 वर्षीय छोटे भाई को पैसे देकर बाहर भेज दिया और किशोरी के साथ बर्बरता की। दुर्भाग्यवश, इस जघन्य वारदात के बाद पीड़िता की मृत्यु हो गई थी।
न्यायालय की तल्ख टिप्पणी: फैसला सुनाते समय डॉ. मनीषा चौधरी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा:
“ऐसे घृणित अपराध केवल व्यक्ति के विरुद्ध नहीं, बल्कि समस्त समाज के विरुद्ध हैं। समाज में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसे अपराधियों के मन में कानून का भय होना अत्यंत आवश्यक है।”
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अहम जानकारी:
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सजा: 20 वर्ष का कठोर कारावास और ₹1.20 लाख जुर्माना।
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मुआवजा: कोर्ट ने पीड़ित प्रतिकर स्कीम के तहत परिजनों को 4 लाख रुपये देने की अनुशंसा की है।
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पैरवी: राज्य की ओर से शिवचंद भोजक और पीड़ित पक्ष की ओर से सुखदेव व्यास ने मजबूती से पक्ष रखा।
पुलिस द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने माना कि ऐसे कुत्सित मानसिकता वाले अपराधियों को समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है, और कठोर दंड ही एकमात्र विकल्प है।
