बीकानेर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पीबीएम के नेत्र विभाग में एक महत्वपूर्ण चिकित्सा मशीन पिछले दो वर्षों से बंद पड़ी होने का मामला सामने आया है। इस लापरवाही के कारण मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
सूरतगढ़ निवासी अजय चुघ ने इस गंभीर समस्या को लेकर अस्पताल अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया को पत्र लिखकर जल्द समाधान की मांग की है। उन्होंने बताया कि वे पिछले एक वर्ष से अपने पिता के इलाज के लिए लगातार अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं। उनके पिता का ऑपरेशन पहले इसी अस्पताल में हुआ था, जिसके बाद डॉक्टरों ने आंख से जाला हटाने की सलाह दी थी।
चुघ के अनुसार, जब उन्होंने नेत्र विशेषज्ञ डॉ. मुरली मनोहर से संपर्क किया, तो उन्हें जानकारी दी गई कि जाला हटाने वाली मशीन पिछले दो साल से खराब है। इस कारण मरीजों को निजी अस्पतालों में जाकर 2000 से 2500 रुपए तक खर्च करना पड़ रहा है।
यह स्थिति न केवल मरीजों की जेब पर भारी पड़ रही है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े अस्पताल में आवश्यक मशीन का लंबे समय तक खराब रहना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। इसका सबसे ज्यादा असर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग पर पड़ रहा है।
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इस मामले में अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया ने कहा कि वे पूरे मामले की जानकारी लेकर संबंधित विभागाध्यक्ष से चर्चा करेंगे। यदि मशीन खराब पाई जाती है, तो उसे जल्द ठीक करवाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
फिलहाल मरीजों को उम्मीद है कि प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान करेगा, ताकि उन्हें सस्ती और सुलभ चिकित्सा सेवाएं मिल सकें।
