प्रधानमंत्री Narendra Modi के हालिया संबोधन के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। महिला आरक्षण बिल को लेकर देश की महिलाओं से माफी मांगने और विपक्ष पर निशाना साधने के बाद अब राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot ने तीखा पलटवार किया है।
जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान गहलोत ने प्रधानमंत्री के बयान को चुनावी रणनीति करार देते हुए सीधे चुनौती दे डाली। उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री को अपने दावों पर भरोसा है, तो वे लोकसभा भंग कर तुरंत चुनाव करवाएं। गहलोत के अनुसार, इससे साफ हो जाएगा कि देश की जनता और महिला मतदाता किसके साथ खड़े हैं।
महिला आरक्षण और ओबीसी मुद्दे पर टकराव
गहलोत ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि प्रस्तावित व्यवस्था में ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण का प्रावधान नहीं किया गया, जो सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने यह भी कहा कि वास्तविक स्थिति का आकलन 2026 की संभावित जातिगत जनगणना के बाद ही हो सकेगा।
चुनाव आयोग पर भी उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के संबोधन को चुनावी आचार संहिता के संदर्भ में भी घेरा। उनका आरोप है कि जिन राज्यों में चुनाव चल रहे हैं, वहां इस तरह का संबोधन राजनीतिक प्रभाव डालने की कोशिश है। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग से किसी ठोस कार्रवाई की उम्मीद कम ही है।
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पीएम का बयान और सियासी असर
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में महिला आरक्षण बिल पारित न हो पाने पर खेद जताया था और इसे महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा अहम कदम बताया। उन्होंने विपक्ष पर भी आरोप लगाया कि राजनीतिक कारणों से इस बिल को आगे नहीं बढ़ने दिया गया।
राजस्थान की राजनीति पर असर
राजस्थान में महिला मतदाता हमेशा से निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में यह मुद्दा आने वाले समय में राज्य की राजनीति को प्रभावित कर सकता है। एक तरफ कांग्रेस इसे सामाजिक न्याय और ओबीसी अधिकारों से जोड़कर उठा रही है, वहीं भाजपा इसे विपक्ष की बाधा के रूप में पेश कर रही है।
आने वाले समय में यह सियासी टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं, खासकर तब जब चुनावी माहौल पहले से ही गरम है।
