कोटगेट व सांखला फाटक पर अंडरपास को लेकर जनता की मिली-जुली राय, जलभराव सबसे बड़ी चिंता
बीकानेर, 8 अगस्त —
बीकानेर शहर की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक कोटगेट व सांखला रेलवे फाटक पर लगने वाला जाम अब शायद सुलझने की ओर है। यहां प्रस्तावित अंडरपास को लेकर लॉयन एक्सप्रेस ने अपने फेसबुक पेज पर एक ऑनलाइन सर्वे किया। इस सर्वे में अब तक 812 से अधिक लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराई, जिनमें से अधिकतर लोगों ने अंडरपास को जरूरी बताया, लेकिन कुछ लोगों ने इसके संभावित दुष्प्रभावों को लेकर गंभीर आपत्तियां भी जताई हैं।
समर्थन में क्या बोले लोग?
अधिकांश लोगों का कहना है कि शहर ने इस समस्या को दशकों से झेला है, और अब चाहे कोई भी समाधान हो, ट्रैफिक जाम से राहत मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राजनेताओं को इस समस्या के समाधान का श्रेय नहीं लेना चाहिए, क्योंकि यह जनता की मूलभूत आवश्यकता है, जिसे पूरा करना उनका दायित्व है, न कि उपकार।
विरोध करने वालों की चिंता: जलभराव
वहीं कुछ नागरिकों ने अंडरपास पर असहमति जताते हुए कहा कि यह शहरवासियों के लिए धोखा साबित हो सकता है। उनका तर्क है कि पूरे शहर का पानी कोटगेट की ओर आता है, और यदि यहां अंडरपास बना तो जल निकासी की व्यवस्था न होने पर वह पानी से भर जाएगा। ऐसी स्थिति में लोगों के लिए अंडरपास उपयोग करना मुश्किल हो जाएगा।
- Advertisement -
रानी बाजार अंडरपास का उदाहरण
कुछ लोगों ने रानी बाजार अंडरपास का उदाहरण देते हुए बताया कि हर बारिश में वहां पानी भर जाता है, जिससे वह बंद हो जाता है। यदि कोटगेट पर भी वैसी ही स्थिति बनी, तो यह सुविधा कम और समस्या ज्यादा बन जाएगी।
वैकल्पिक सुझाव: रेलवे लाइन को हटाने की मांग
सर्वे में कुछ लोगों ने यह सुझाव भी दिया कि अंडरपास या ओवरब्रिज के बजाय रेलवे लाइन को शहर से हटाकर बाइपास पर भेजा जाए। इससे न केवल ट्रैफिक की समस्या सुलझेगी, बल्कि स्थानीय व्यापार पर भी असर नहीं पड़ेगा।
बीकानेर के भविष्य को लेकर चिंताएं
सर्वे में भाग लेने वाले कुछ नागरिकों का मानना है कि अंडरपास जैसी संरचना शहर की दीर्घकालीन योजना और विकास दृष्टि से ठीक नहीं है। उन्होंने शहर के भविष्य को देखते हुए अधिक समग्र और पर्यावरणीय समाधान की जरूरत पर बल दिया।
निष्कर्ष:
कोटगेट अंडरपास को लेकर बीकानेर की जनता समर्थन और विरोध दोनों भावनाओं के बीच बंटी हुई नजर आ रही है। जहां एक ओर लोग दशकों पुरानी समस्या के समाधान की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर संभावित जलभराव और अव्यवस्था की आशंका इस योजना को लेकर शंका पैदा कर रही है।
