बीकानेर। अक्सर अपनी सख्ती के लिए पहचानी जाने वाली राजस्थान पुलिस का एक बेहद संवेदनशील रूप मुक्ताप्रसाद नगर में देखने को मिला। यहाँ पुलिस ने न केवल कानून का फर्ज निभाया, बल्कि एक बेबस और नेत्रहीन नाबालिग बेटी के लिए ‘मसीहा’ बनकर सामने आई।
रेस्क्यू ऑपरेशन: जब बंद दरवाजे के पीछे मिली मासूम रविवार को पुलिस कंट्रोल रूम पर एक गुमनाम सूचना मिली कि एक बच्ची को घर में बंधक बनाकर प्रताड़ित किया जा रहा है। थानाधिकारी विजेंद्र शीला के नेतृत्व में पुलिस टीम ने बिना वक्त गंवाए मौके पर दबिश दी। वहाँ जो मंजर था, उसने पुलिसकर्मियों के दिल को भी झकझोर दिया। नेत्रहीन होने के कारण जो बच्ची अपनों के सहारे की हकदार थी, उसे अपनों ने ही उपेक्षा और दुर्व्यवहार की कड़ियों में जकड़ रखा था।
मासूम का छलका दर्द पूछताछ के दौरान बालिका ने अपनी आपबीती सुनाई। उसने बताया कि उसे न तो घर से बाहर निकलने दिया जाता था और न ही उसकी बुनियादी जरूरतों का ध्यान रखा जाता था। उसकी बेबसी का फायदा उठाकर उसे घर के एक कोने तक सीमित कर दिया गया था। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए परिजनों को फटकार लगाई और बालिका को अपने संरक्षण में लिया।
‘थैंक यू दीदी’: एक भावुक पल बाल कल्याण समिति (CWC) के आदेश पर जब बालिका को नारी निकेतन ले जाया जाने लगा, तब एक भावुक दृश्य देखने को मिला। डरी-सहमी बच्ची ने महिला सिपाही सुमन को गले लगा लिया और रूंधे गले से ‘थैंक यू दीदी’ कहा। उपनिरीक्षक सुरेश और सिपाही सुमन की संवेदनशीलता ने उस मासूम के मन में पुलिस के प्रति अटूट विश्वास जगा दिया।
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अब सुरक्षित हाथों में भविष्य पुलिस ने बच्ची को भरोसा दिलाया है कि अब वह अकेली नहीं है। प्रशासन और पुलिस उसके बेहतर भविष्य और सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। यह घटना याद दिलाती है कि वर्दी के भीतर भी एक धड़कता हुआ दिल होता है, जो अन्याय के खिलाफ और मजलूमों के हक में हमेशा खड़ा रहता है।
