बीकानेर जिले के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों में शामिल कोडमदेसर तालाब के पुनरुद्धार को लेकर अब प्रशासन सक्रिय नजर आ रहा है। जिला परिषद ने इस ऐतिहासिक और आस्था से जुड़े स्थल के संरक्षण के लिए पहल तेज कर दी है।
जिला कलेक्टर और जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी के निर्देश पर शनिवार को एक विशेष टीम ने तालाब का निरीक्षण किया। अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रियंका तलानिया के नेतृत्व में पहुंची टीम ने तालाब की मौजूदा स्थिति का विस्तृत जायजा लिया और इसके पुनर्जीवन को लेकर संभावित योजनाओं पर चर्चा की।
निरीक्षण के दौरान साफ-सफाई, गाद हटाने (डिसिल्टिंग) और जल की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने जैसे अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि तालाब में सालभर पानी बना रहे, इसके लिए नहर से जल आपूर्ति के विकल्पों का तकनीकी मूल्यांकन किया जाए।
अधिकारियों का मानना है कि यदि नहर से नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित हो जाती है, तो कोडमदेसर तालाब न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि पर्यटन के लिहाज से भी एक आकर्षक केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।
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अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रियंका तलानिया ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि तालाब के पुनरुद्धार के लिए जल्द से जल्द ठोस और व्यवहारिक कार्ययोजना तैयार कर उसे जमीन पर उतारा जाए। उन्होंने कहा कि कोडमदेसर तीर्थ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है।
इस मौके पर कोलायत के विकास अधिकारी वीरपाल सिंह, जेठाराम कुम्हार, सहायक अभियंता तथा पंचायत राज विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे। सभी ने मिलकर तालाब के संरक्षण और विकास के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रशासन की इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में कोडमदेसर तालाब अपने पुराने वैभव को पुनः प्राप्त कर सकेगा और श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा।
