बीकानेर में राजस्थानी भाषा, साहित्य, संस्कृति और कला को समर्पित प्रज्ञालय संस्थान द्वारा एक विशेष साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आयोजन किया गया। लक्ष्मीनारायण रंगा सृजन-सदन में राजस्थानी डॉक्यूमेंट्री फिल्म का भव्य प्रदर्शन किया गया, जिसका उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी भाषा और संस्कृति से जोड़ना रहा। यह फिल्म वरिष्ठ राजस्थानी रचनाकार नागराज शर्मा को समर्पित है।
फिल्म प्रदर्शन के बाद दूसरे सत्र में राजस्थानी भाषा और संस्कृति पर केंद्रित एक परिसंवाद आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार मधु आचार्य ‘आशावादी’ ने कहा कि मातृभाषा और संस्कृति को संजोकर रखना आवश्यक है, क्योंकि अनेक भाषाएं समय के साथ विलुप्त हो चुकी हैं। उन्होंने ऐसे आयोजनों को नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
परिसंवाद की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि और आलोचक मालचंद तिवाड़ी ने कहा कि राजस्थानी भाषा के संरक्षण और मान्यता के लिए हर स्तर पर प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने शिक्षा में राजस्थानी भाषा को अनिवार्य रूप से शामिल करने की भी बात कही, जिससे युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ सके।
कार्यक्रम की शुरुआत में एडवोकेट कमल रंगा ने मातृभाषा को पहचान और संस्कृति का आधार बताया। वहीं शिक्षाविद् राजेश रंगा ने फिल्म निर्माण टीम का आभार जताया।
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इस अवसर पर कई साहित्यकार, कलाकार और युवा प्रतिभागी मौजूद रहे, जिन्होंने फिल्म देखी और परिसंवाद में सक्रिय रूप से विचार साझा किए। कार्यक्रम का संचालन गिरिराज पारीक ने किया और आभार अरविन्द चौधरी ने व्यक्त किया।
