नई दिल्ली। दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर मालिकाना हक जताने वाली सुल्ताना बेगम की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। खुद को अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर के वंशज की विधवा बताने वाली सुल्ताना ने दावा किया था कि लाल किला उनके पूर्वजों की संपत्ति है, जिसे 1857 के बाद ब्रिटिशों ने जबरन छीन लिया।
सुल्ताना बेगम ने याचिका में कहा कि उनके पति मिर्जा मोहम्मद बेदार बख्त बहादुर शाह जफर के परपोते थे और उनकी मृत्यु 1980 में हुई थी। उन्होंने दावा किया कि 1857 की क्रांति के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी ने लाल किले पर कब्जा कर लिया और उनके शाही खजाने को भी लूट लिया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने याचिका पर सवाल उठाते हुए टिप्पणी की, “केवल लाल किला ही क्यों? फतेहपुर सीकरी और अन्य मुगल स्थलों पर दावा क्यों नहीं किया गया?” कोर्ट ने अत्यधिक देरी और अपर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर याचिका को खारिज कर दिया।
इससे पहले दिसंबर 2021 में दिल्ली हाई कोर्ट ने भी सुल्ताना की याचिका को खारिज कर कहा था कि 150 वर्षों से अधिक की देरी का कोई तार्किक कारण नहीं बताया गया है, और उनके पास वंशावली या संबंध साबित करने के लिए कोई दस्तावेज नहीं है।
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लाल किला भारत की ऐतिहासिक धरोहर है, जिसे 1638 में मुगल सम्राट शाहजहां ने बनवाया था। यह न सिर्फ मुगल वास्तुकला का प्रतीक है, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का भी अहम केंद्र रहा है। 2007 में इसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था और वर्तमान में यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में है।
