नई दिल्ली।
भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हमले के जवाब में कड़ी कार्रवाई की तैयारी के लिए रक्षा सचिव के साथ एक विशेष बैठक की। यह बैठक भारत की रणनीतिक और सैन्य तैयारियों को मजबूत करने के उद्देश्य से बुलाई गई थी।
पहलगाम हमले में 28 लोग मारे गए थे, और इसे लेकर भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ निर्णायक कदम उठाने का विचार किया है। इस बैठक में रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) भी शामिल थे। सूत्रों के अनुसार, पीएम मोदी ने सशस्त्र बलों को जवाबी कार्रवाई के लिए पूरी छूट दी है, जिसमें समय, तरीका और लक्ष्य का चयन सेना के विवेक पर छोड़ा गया है।
भारत का मुंहतोड़ जवाब
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस मामले में कड़ा बयान देते हुए कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, जो देश चाहता है, वह निश्चित रूप से होगा।” उन्होंने पाकिस्तान द्वारा नियंत्रण रेखा (LoC) पर किए गए सीजफायर उल्लंघन की घटनाओं की निंदा की और कहा कि भारत इसका मुंहतोड़ जवाब दे रहा है। सूत्रों के अनुसार, भारत ने इस तनाव के बीच कई सख्त कदम उठाए हैं, जिनमें पाकिस्तान के साथ डाक सेवाओं और आयात पर रोक शामिल है। इसके अलावा, भारतीय वायुसेना ने गंगा एक्सप्रेसवे पर युद्धाभ्यास किया, जो पाकिस्तान को एक साफ संदेश देता है।
पाकिस्तान की सैन्य गतिविधियां
पाकिस्तान ने भी अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भारत को चेतावनी दी है कि यदि भारत ने सिंधु जल समझौते को प्रभावित करने की कोशिश की, तो इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। इसके अलावा, पाकिस्तान ने PoK में आपातकाल की घोषणा की है और अपनी वायुसेना का युद्धाभ्यास शुरू किया है।
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भारत को अमेरिका का समर्थन
अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस तनाव पर नजर बनाए हुए है। अमेरिका ने भारत का समर्थन करते हुए कहा है कि वह स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है, जबकि कई देश दोनों पक्षों से शांति की अपील कर रहे हैं। यह स्थिति न केवल भारत-पाकिस्तान संबंधों को प्रभावित कर रही है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता पर भी गहरा असर डाल सकती है। आने वाले दिनों में भारत की ओर से उठाए गए कदम वैश्विक मंच पर भी चर्चा का विषय बने रहेंगे।
