बीकानेर। नगर निगम और बीकानेर विकास प्राधिकरण (बीडीए) शहर की दो बड़ी समस्याओं—जलभराव और भूजल गिरावट—का एकसाथ समाधान करने जा रहे हैं। बीकानेर में भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है, वहीं मामूली बारिश में भी कई इलाके डूब जाते हैं। इन दोनों समस्याओं से निपटने के लिए शहर के 16 चिन्हित जलभराव प्रभावित क्षेत्रों में 400-400 फीट गहराई तक के रिचार्ज कुएं खोदे जाएंगे।
नगर निगम और बीडीए ने इस योजना के लिए टेंडर जारी कर दिए हैं। नगर निगम 8 और बीडीए 8 कुएं तैयार करेगा। इन कुओं को कोठारी हॉस्पिटल, कलेक्ट्रेट परिसर, पूगल रोड, गजनेर रोड जैसे उन स्थानों पर खोदा जाएगा जहां हर साल बारिश के बाद पानी जमा हो जाता है और लोगों को भारी परेशानी होती है। इन कुओं के माध्यम से बारिश का पानी धरती में समा सकेगा, जिससे जलभराव में राहत मिलेगी और भूजल स्तर में सुधार होगा।
महत्वपूर्ण बात यह है कि कुओं में सिर्फ साफ बारिश का पानी जाए, इसके लिए तकनीकी उपाय किए जाएंगे ताकि कचरा और गंदगी कुएं में प्रवेश न करें। यह योजना पश्चिमी राजस्थान में गिरते जलस्तर को देखते हुए और भी आवश्यक हो जाती है।
बीकानेर देश में सबसे कम भूजल स्तर वाले शहरों में
बीकानेर में हर वर्ष लगभग 23.75 करोड़ घन मीटर शुद्ध भूजल उपलब्ध होता है, लेकिन यहां 31.4 करोड़ घन मीटर भूजल का दोहन किया जा रहा है। यह मात्रा राज्य में सिंचाई, घरेलू और औद्योगिक कार्यों में उपयोग की जा रही है, जो कि अधिक दोहन की स्थिति है।
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वर्तमान में बीकानेर का अधिकतम भूजल स्तर 128.15 मीटर बिलो ग्राउंड लेवल (एमबीजीएल) तक पहुंच गया है। राजस्थान के अन्य जिले जैसे जोधपुर (115.38 एमबीजीएल), नागौर (108.40 एमबीजीएल), और जैसलमेर (107.26 एमबीजीएल) भी शीर्ष चार में शामिल हैं। प्रदेश के 900 निगरानी कुओं में से 175 में जलस्तर 40 एमबीजीएल से अधिक गहराई पर है।
डायनामिक ग्राउंड वाटर रिसोर्सेज ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में जितना भूजल रिचार्ज हो रहा है, उससे 150.22 प्रतिशत अधिक निकासी हो रही है। 2025 तक राज्य में घरेलू उपयोग के लिए भूजल की आवश्यकता 2.17 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) होगी, जबकि उपलब्धता केवल 0.99 बीसीएम रहने का अनुमान है।
यह योजना बीकानेर के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है, जो शहर की भविष्य की जल समस्या को कम कर सकती है।
