बीकानेर। पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं की मौत और गंभीर रूप से बीमार हुई महिलाओं का मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। अस्पताल प्रशासन के अलग-अलग बयानों और अब तक स्पष्ट कारण सामने नहीं आने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं पूरे घटनाक्रम को लेकर स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली भी जांच के दायरे में है।
जानकारी के अनुसार जून माह की शुरुआत से ही प्रसव के बाद महिलाओं की तबीयत बिगड़ने और मौत के मामलों ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है। सूत्रों के मुताबिक श्रीडूंगरगढ़ निवासी 24 वर्षीय पूजा बोहरा को 2 जून को पीबीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अगले दिन सीजेरियन प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव होने से उसकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि मामले में पोस्टमार्टम नहीं कराया गया और शव परिजनों को सौंप दिया गया। हालांकि इस संबंध में अस्पताल प्रशासन की ओर से आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
मामले से जुड़े सूत्रों का दावा है कि अब तक प्रसव के बाद 13 महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि दो प्रसूताएं वेंटिलेटर पर जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रही हैं। इसके अलावा कुछ अन्य महिलाओं का उपचार अभी भी जारी है। हालांकि इन आंकड़ों को लेकर प्रशासन की ओर से आधिकारिक और विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार है।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार प्रसव के बाद महिलाओं की मौत के प्रमुख कारणों में अत्यधिक रक्तस्राव (पीपीएच), एनीमिया, संक्रमण, उच्च रक्तचाप, किडनी फेल होना, सेप्सिस और एक्लेम्पसिया जैसी जटिलताएं शामिल हो सकती हैं। वर्तमान में गंभीर हालत में भर्ती महिलाओं में भी ऐसी ही चिकित्सकीय समस्याएं बताई जा रही हैं।
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घटनाक्रम के बाद अस्पताल प्रशासन ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। जनाना ऑपरेशन थिएटर में संक्रमण की संभावना को ध्यान में रखते हुए नियमित रूप से बैक्टीरिया जांच करवाई जा रही है। ऑपरेशन थिएटर की हवा, उपकरण, ऑपरेशन टेबल, कपड़ों और अन्य सामग्री के नमूने लेकर परीक्षण के लिए भेजे गए हैं।
वहीं प्रसव के बाद महिलाओं की किडनी प्रभावित होने के मामलों की जांच के लिए अब तक 33 प्रकार की दवाओं, इंजेक्शनों, रक्त और अन्य चिकित्सा सामग्री के नमूने देश की विभिन्न प्रयोगशालाओं में भेजे गए हैं। ये सैंपल गाजियाबाद, कोलकाता, जयपुर, मुंबई और पुणे स्थित लैब में जांच के लिए भेजे गए हैं। अधिकारियों के अनुसार रिपोर्ट आने में 20 से 25 दिन का समय लग सकता है।
एहतियात के तौर पर उन दवाओं और इंजेक्शनों के उपयोग पर रोक लगा दी गई है, जिनका इस्तेमाल प्रभावित महिलाओं के उपचार में किया गया था। फिलहाल वैकल्पिक चिकित्सा सामग्री का उपयोग किया जा रहा है।
इस पूरे मामले में अस्पताल प्रशासन पर पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जनाना विंग की जिम्मेदारियों और व्यवस्थाओं को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा हो रही है। हालांकि किसी भी अधिकारी या चिकित्सक की जिम्मेदारी तय करने से पहले जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है और रिपोर्ट मिलने के बाद ही वास्तविक कारणों तथा संभावित जिम्मेदारियों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल पूरे मामले पर प्रदेशभर की नजर बनी हुई है।
