बीकानेर में अवैध हथियारों और फिरौती से जुड़े मामले ने नया मोड़ ले लिया है। पुलिस के हाथ दो पिस्टल लग चुकी हैं, लेकिन तीसरी पिस्टल अब भी लापता है, जिससे शहर में किसी बड़ी वारदात की आशंका जताई जा रही है।
कोतवाली थाना पुलिस ने लॉरेंस गैंग के नाम पर भोपाल के कारोबारी से 10 करोड़ रुपये की फिरौती मांगने के आरोपी दुर्गेश सोनी को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी ने तीन पिस्टल मंगवाई थीं, जबकि अब तक केवल दो ही बरामद हो पाई हैं। तीसरी पिस्टल कहां है और किसके पास है, इसको लेकर पुलिस अभी तक स्पष्ट जानकारी नहीं दे पाई है।
जांच में यह भी सामने आया है कि दुर्गेश ने बाल सुधार गृह में रह चुके जेपी डारा के जरिए ये हथियार मंगवाए थे। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी हुई है। बताया जा रहा है कि हथियारों की सप्लाई और पैसों के लेन-देन में कई लोगों की भूमिका रही है।
प्रारंभिक पूछताछ में दुर्गेश ने खुलासा किया कि फड़बाजार निवासी साजिद मुगल से पुरानी रंजिश के चलते उसने इन हथियारों का इंतजाम किया था। यानी यह मामला सिर्फ फिरौती तक सीमित नहीं, बल्कि आपसी दुश्मनी से भी जुड़ा हुआ है।
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इस केस में एक संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसमें जेपी डारा, दिनेश सुथार और डारा की मौसी की भूमिका सामने आई है। आरोप है कि डारा ने बाल सुधार गृह में रहते हुए हथियारों की डील की, दिनेश ने लॉजिस्टिक्स संभाले और मौसी ने फिरौती की रकम के लेन-देन को मैनेज किया।
भोपाल पुलिस पहले ही इस नेटवर्क से जुड़े कुछ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि बीकानेर पुलिस अब मुख्य सप्लायर और फरार हथियार की तलाश में जुटी हुई है। तीसरी पिस्टल का नहीं मिलना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यदि यह हथियार गलत हाथों में रहा तो शहर में किसी भी समय गंभीर वारदात हो सकती है। इसलिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है और संदिग्धों से पूछताछ जारी है।
फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है और पुलिस इस नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के प्रयास में जुटी हुई है।
