बीकानेर में करीब 11 साल पुराने मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए नगर निगम की टीम पर हमला करने वाले आरोपियों को सजा सुनाई है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या एक ने मामले की सुनवाई पूरी करते हुए चार आरोपियों को दोषी करार दिया, जबकि एक आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।
दो आरोपियों को दो-दो साल की सजा
अदालत ने आरोपी मोहम्मद हारुन खोखर और कैलाश सोनी को गंभीर धाराओं में दोषी मानते हुए प्रत्येक को दो-दो साल के कारावास और 7,000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है।
दो अन्य को एक-एक साल की सजा
वहीं, विशाल भार्गव उर्फ छोटू और अख्तर सैयद को एक-एक साल के कारावास के साथ 3,000 रुपए अर्थदंड से दंडित किया गया है। मामले में आरोपी प्रताप सिंह को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया।
क्या था पूरा मामला
यह घटना 17 जून 2015 की है, जब नगर निगम बीकानेर की टीम सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र में लेडी एल्गिन स्कूल के पास अतिक्रमण हटाने पहुंची थी। कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने एकजुट होकर निगम कर्मचारियों पर हमला कर दिया।
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शिकायतकर्ता गोपालराम के अनुसार, आरोपियों ने कर्मचारियों के साथ मारपीट की, गाली-गलौज की और उनके कपड़े तक फाड़ दिए। इतना ही नहीं, मौके पर मौजूद जेसीबी और ट्रैक्टर में भी तोड़फोड़ की गई, जिससे राजकार्य बाधित हुआ।
27 गवाहों के आधार पर फैसला
अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट में कुल 27 गवाह पेश किए गए, जिनके आधार पर अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहराया।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
अपने फैसले में अदालत ने कहा कि अतिक्रमण अब एक “गंभीर बीमारी” का रूप ले चुका है। सरकारी कर्मचारी बिना किसी निजी स्वार्थ के अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे, ऐसे में उनके साथ हिंसा और अपमानजनक व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में सख्त सजा जरूरी है, ताकि समाज में कानून के प्रति सम्मान बना रहे और भविष्य में कोई भी व्यक्ति कानून को हाथ में लेने की कोशिश न करे।
