बीकानेर स्थापना दिवस के अवसर पर शनिवार को शहर में भक्ति और सांस्कृतिक रंगों से सजी एक भव्य संध्या का आयोजन किया गया। जिला प्रशासन, नगर विकास न्यास बीकानेर, बीकानेर विकास प्राधिकरण और श्री लक्ष्मीनाथ मंदिर विकास एवं पर्यावरण समिति के संयुक्त तत्वावधान में यह कार्यक्रम श्री लक्ष्मीनाथ मंदिर परिसर में आयोजित हुआ।
समिति के सचिव सीताराम कच्छावा के अनुसार कार्यक्रम की शुरुआत सुप्रसिद्ध भजन गायक गौरी शंकर सोनी द्वारा गणेश वंदना से हुई, जिसने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद भजन गायक जितेंद्र सारस्वत ने ‘श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी’, ‘चौक पुरावो’ और ‘माटी रंगावो’ जैसे भजनों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। इस दौरान साधना सारस्वत, स्वाति शर्मा, पंकज भटनागर, त्रिलोक सोनी और जानकी नारायण ने कोरस में सहयोग किया।
कार्यक्रम में श्री वीणा शिक्षण संस्थान (शुद्ध कथक नृत्य एकेडमी, बीकानेर) के कलाकारों ने विष्णु वंदना ‘शांताकारम भुजंग शयनम’ की मनमोहक प्रस्तुति दी। छोटे बच्चों द्वारा कृष्ण महारास और वरिष्ठ विद्यार्थियों द्वारा कृष्ण वंदना के साथ शुद्ध कथक नृत्य में तराना ने दर्शकों का दिल जीत लिया।
संगीत की प्रस्तुति में मास्टर तेजस जोशी ने सोलो तबला वादन से सभी को प्रभावित किया, जबकि हारमोनियम पर कृष्ण कुमार जोशी ने संगत की। स्थानीय गायक सूर्या डागले और अशोक बोहरा ने राजस्थानी लोकगीत प्रस्तुत कर माहौल को जीवंत बना दिया।
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कत्थक नृत्याश्रम की ओर से नृत्य गुरु अमित सारस्वत के निर्देशन में विजय लक्ष्मी स्वामी, मायरा यादव और कासवी पंडित ने जयपुर घराने की शुद्ध कथक शैली की शानदार प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण राजस्थानी लोक गायक बबलू खान एंड पार्टी रही, जिन्होंने ‘गोरबंद’, ‘हिचकी’ और ‘छाप तिलक सब छीनी रे’ जैसे लोकगीतों से मरुस्थलीय संस्कृति की सुगंध बिखेरी।
कार्यक्रम के दौरान अतिथियों का स्वागत समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों द्वारा किया गया। संचालन ज्योति प्रकाश रंगा ने किया और पूरे आयोजन को सफल बनाने में कई गणमान्य लोगों का योगदान रहा।
यह सांस्कृतिक संध्या बीकानेर की समृद्ध परंपरा, कला और संस्कृति का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई, जिसने दर्शकों को एक यादगार अनुभव प्रदान किया।
