बीकानेर के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और किडनी संक्रमण के मामलों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर की एक टिप्पणी को लेकर कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया है। कांग्रेस महिला कार्यकर्ताओं ने बीकानेर के कोटगेट पर प्रदर्शन करते हुए मंत्री का पुतला दहन किया और उनके बयान को महिलाओं के प्रति असंवेदनशील बताया।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और किडनी संक्रमण के मामलों के बाद चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर बीकानेर दौरे पर पहुंचे थे। दौरे के दौरान आयोजित प्रेस वार्ता में पत्रकारों ने अस्पताल में उपचार व्यवस्था और संभावित लापरवाही को लेकर सवाल पूछे।
इसी दौरान मंत्री की एक टिप्पणी चर्चा का विषय बन गई। पत्रकारों के सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि यह पता किया जाए कि बीमार महिलाएं अस्पताल में चलकर आई थीं या नाचते हुए। इस बयान के सामने आने के बाद विपक्षी दलों और महिला संगठनों ने इसे महिलाओं की गरिमा से जुड़ा मुद्दा बताते हुए विरोध शुरू कर दिया।
कांग्रेस ने जताया कड़ा विरोध
कांग्रेस महिला कार्यकर्ताओं ने कोटगेट पर प्रदर्शन कर मंत्री के बयान के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रसव पीड़ा झेलने वाली महिलाओं के बारे में इस प्रकार की टिप्पणी करना अनुचित और असंवेदनशील है।
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ओबीसी कांग्रेस जिला अध्यक्ष उमा सुथार ने कहा कि एक महिला प्रसव के दौरान अत्यंत कठिन शारीरिक और मानसिक पीड़ा से गुजरती है। ऐसे समय को लेकर की गई टिप्पणी महिलाओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली है। उन्होंने मंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
अस्पताल प्रशासन पर उठे सवाल
प्रेस वार्ता के दौरान चिकित्सा मंत्री ने यह भी कहा कि फिलहाल अस्पताल में इलाज में लापरवाही की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि मामले की जांच जारी है और दवाओं की गुणवत्ता सहित विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, प्राथमिक स्तर पर 27 प्रकार की दवाओं के नमूने जांच के लिए लिए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मरीजों की स्थिति बिगड़ने के पीछे कोई दवा या अन्य कारण जिम्मेदार था या नहीं।
विरोध जारी रहने के संकेत
कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं का कहना है कि जब तक मंत्री अपने बयान पर स्पष्टीकरण नहीं देते या माफी नहीं मांगते, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। वहीं प्रसूताओं के परिजन अस्पताल की व्यवस्थाओं और जांच प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं तथा निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं से आगे बढ़कर राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही अस्पताल में सामने आए स्वास्थ्य संबंधी मामलों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
