बीकानेर की शान Junagarh Fort एक बार फिर विवादों में है। किले की दीवारों पर किए जा रहे एक्रेलिक पेंट को लेकर अब खुलकर विरोध सामने आने लगा है। इस मुद्दे ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि विरासत संरक्षण को लेकर भी बहस तेज कर दी है।
ट्रस्ट के कार्यों पर उठे सवाल
मामले में Maharaja Rai Singh Trust की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। ट्रस्ट, जो किले की देखरेख करता है, वर्तमान में Siddhi Kumari के नियंत्रण में है।
उनकी बुआ Rajyashree Baisa ने कड़े शब्दों में कहा कि किले पर आधुनिक पेंट का उपयोग ‘धरोहर के साथ छेड़छाड़’ है और यह ट्रस्ट के संसाधनों का दुरुपयोग भी हो सकता है।
संरचना और सौंदर्य को नुकसान की आशंका
राज्यश्री बाईसा के अनुसार, एक्रेलिक पेंट से किले के पत्थरों की प्राकृतिक बनावट प्रभावित हो सकती है। इससे दीवारों के कमजोर होने और समय के साथ पत्थरों के झड़ने का खतरा भी बढ़ सकता है। उनका कहना है कि यह कदम किले की मौलिकता और ऐतिहासिक पहचान को नुकसान पहुंचा सकता है।
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वसीयत और मूल स्वरूप बनाए रखने की बात
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि Dr. Karni Singh ने अपनी वसीयत में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि Junagarh Fort और Lalgarh Palace का मूल स्वरूप हमेशा सुरक्षित रखा जाए।
अन्य परियोजनाओं पर भी सवाल
विवाद केवल किले तक सीमित नहीं है। Lalgarh Palace में भी निर्माण कार्यों को लेकर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। शांति निवास भवन के स्वरूप में बदलाव और महंगे कार्यों को अनावश्यक बताया गया है।
युवाओं का विरोध और आगे की तैयारी
इस मुद्दे पर बीकानेर के युवा भी सक्रिय हो गए हैं। विरोध स्वरूप एक पिटीशन तैयार की गई है, जिस पर कई लोगों के हस्ताक्षर हो चुके हैं। जल्द ही इस मामले में मुख्य सचिव, पर्यटन विभाग और पुरातत्व विभाग को शिकायत भेजने की तैयारी है।
कोर्ट जाने की चेतावनी
राज्यश्री बाईसा ने स्पष्ट कहा कि यदि किले की मौलिकता से समझौता किया गया तो वे कानूनी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगी। उनका कहना है कि यह धरोहर सिर्फ बीकानेर नहीं, बल्कि पूरे देश की पहचान है और इसे बचाना सभी की जिम्मेदारी है।
निष्कर्ष
जूनागढ़ किले पर चल रहा यह विवाद अब गंभीर रूप ले चुका है। विरासत संरक्षण और आधुनिक हस्तक्षेप के बीच संतुलन को लेकर प्रशासन और ट्रस्ट के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
