बीकानेर में नगर निगम की वित्तीय कार्यप्रणाली और बैंकिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। विकास कार्यों के लिए बजट की कमी बताने वाला निगम अब चेक बाउंस की घटनाओं से अपनी साख खोता नजर आ रहा है।
हाल ही में एक फर्म को भुगतान के लिए जारी किए गए ₹20.97 लाख और ₹5.33 लाख के दो चेक कोटक महिंद्रा बैंक में बाउंस हो गए। सरकारी संस्था के चेक का अनादरित होना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि निगम की आर्थिक स्थिति पर भी सवाल खड़े करता है।
इस मामले में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि खाते में पर्याप्त राशि या प्रक्रिया पूरी नहीं थी, तो चेक जारी क्यों किए गए। हालांकि निगम प्रशासन का कहना है कि चेक राशि की कमी से नहीं, बल्कि नए आयुक्त के हस्ताक्षर बैंक में सत्यापित न होने के कारण बाउंस हुए। इसके बावजूद यह तर्क संदेह पैदा करता है, क्योंकि अधूरे रिकॉर्ड के बावजूद उन्हीं हस्ताक्षरों से चेक जारी किए गए।
कानूनी दृष्टि से यह मामला गंभीर हो सकता है। Negotiable Instruments Act, 1881 की धारा 138 के तहत चेक बाउंस होना दंडनीय अपराध है, जिसमें संबंधित अधिकारी के खिलाफ केस दर्ज हो सकता है। दोष सिद्ध होने पर दो साल तक की सजा या चेक राशि का दोगुना जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
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इस बीच, संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा ने निर्देश दिए थे कि निगम अपने खाते सीमित कर केवल दो सरकारी बैंकों में ही लेनदेन करे। हालांकि आदेश के बाद कुछ खाते बंद किए गए, लेकिन अब भी कई निजी बैंकों में खाते सक्रिय बताए जा रहे हैं।
वहीं भाजपा नेता भगवान सिंह मेड़तिया ने इस पूरे मामले को अधिकारियों की लापरवाही बताते हुए “कॉकस” की साजिश करार दिया है। उनका आरोप है कि कुछ लोग सरकार की छवि खराब करने में लगे हैं और इसमें उच्च स्तर की मिलीभगत से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
