

नई दिल्ली: भारत सरकार ने विदेशी नागरिकों और आव्रजन से संबंधित मामलों को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हाल ही में संसद द्वारा पारित “आव्रजन और विदेशी विधेयक, 2025” को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही यह विधेयक अब कानून का रूप ले चुका है और केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित कर दिया गया है।
इस नए कानून के अंतर्गत, अगर कोई व्यक्ति भारत में प्रवेश, प्रवास या भारत छोड़ने के लिए जाली पासपोर्ट या वीजा का उपयोग करता है या ऐसा दस्तावेज़ किसी को प्रदान करता है, तो उसे 2 से 7 वर्ष तक की जेल और 1 लाख से 10 लाख रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।
नए कानून के प्रमुख प्रावधान:
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फर्जी पासपोर्ट/वीजा पर सख्त सजा: जाली दस्तावेजों के उपयोग या वितरण पर 7 साल तक की कैद और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना।
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विदेशियों की निगरानी: होटल, यूनिवर्सिटी, अस्पताल और नर्सिंग होम को यह अनिवार्य रूप से सूचित करना होगा कि उनके परिसर में कोई विदेशी नागरिक कितनी अवधि तक रह रहा है। इससे अवधि से अधिक ठहरने वाले विदेशी नागरिकों पर निगरानी रखी जा सकेगी।
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विस्तृत नियंत्रण प्रणाली: नया कानून विदेशी नागरिकों की भारत में एंट्री, रजिस्ट्रेशन, प्रवास और निकासी को एकीकृत रूप से नियंत्रित करने का काम करेगा।
चार पुराने कानून होंगे निरस्त:
इस नए कानून के लागू होने के बाद, निम्नलिखित चार पुराने कानूनों को निरस्त किया जाएगा:
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पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920
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विदेशियों का पंजीकरण अधिनियम, 1939
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विदेशियों का अधिनियम, 1946
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आव्रजन (वाहक दायित्व) अधिनियम, 2000
क्यों जरूरी था यह कानून?
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, 1 अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2024 के बीच करीब 98.40 लाख विदेशी नागरिक भारत आए। ऐसे में फर्जी दस्तावेजों और अवैध ठहराव को रोकने के लिए एक केंद्रीकृत और सख्त कानून की जरूरत महसूस की जा रही थी।
यह नया कानून आने वाले समय में भारत की सुरक्षा, पहचान सत्यापन प्रणाली और अंतरराष्ट्रीय यात्राओं पर बड़ा असर डाल सकता है।