

जयपुर: राजस्थान की खाद्य सुरक्षा योजना में सरकार ने एक अहम बदलाव किया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने योजना से वंचित पात्र लोगों को जोड़ने और अपात्र लोगों को हटाने की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रदेश के सभी जिला कलक्टरों को विशेष अधिकार सौंपे हैं।
मुख्यमंत्री ने यह निर्णय लोगों की समस्याओं को प्रत्यक्ष रूप से सुनने और समाधान की दिशा में तत्परता दिखाते हुए लिया। अब जिला कलक्टर स्वयं खाद्य सुरक्षा सूची से अपात्र लोगों के नाम हटा सकेंगे और नए पात्र लोगों के नाम जोड़ सकेंगे।
रात्रि चौपाल में सामने आई समस्या
यह निर्णय तब लिया गया जब रात्रि चौपालों के दौरान लोगों ने शिकायत की कि वे योजना के पात्र होते हुए भी सूची में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। कलक्टरों के पास भी ऐसा कोई अधिकार नहीं था कि वे तुरंत कार्रवाई कर सकें। इसी बात को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने कलक्टरों को अधिकृत करने का निर्णय लिया।
गजट नोटिफिकेशन जारी, प्रक्रिया पर स्थिति स्पष्ट नहीं
राज्य सरकार ने जिला कलक्टरों को अधिकार देने का गजट नोटिफिकेशन तो जारी कर दिया है, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कलक्टर के पास सीधे आने वाले आवेदनों की जांच और स्वीकृति किस प्रक्रिया से होगी।
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वर्तमान प्रक्रिया क्या है?
श्रीगंगानगर की जिला रसद अधिकारी कविता के अनुसार, वर्तमान में नाम जोड़ने के लिए पोर्टल 26 जनवरी से खुला हुआ है। लोग घर से ऑनलाइन या ई-मित्र केंद्र के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। इन आवेदनों की समिति द्वारा जांच की जाती है। पात्र पाए जाने पर नाम सूची में जोड़ दिया जाता है।
यदि किसी व्यक्ति के अपात्र होने की शिकायत मिलती है, तो जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाती है। अपात्र लोगों से गिव-अप अभियान के तहत योजना से बाहर होने की अपील की जा रही है।
नई व्यवस्था से ये होंगे फायदे
इस बदलाव से अब ऐसे पात्र लोग भी योजना में शामिल हो सकेंगे, जो पहले किसी तकनीकी या प्रशासनिक बाधा के चलते वंचित रह जाते थे। साथ ही योजना से निष्पक्षता और पारदर्शिता को भी बल मिलेगा। सरकार का यह कदम लाभार्थियों तक योजनाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।