

बृजेश सिंह, बीकानेर। मोबाइल और कंप्यूटर के अत्यधिक उपयोग से ‘टेक्स्ट नेक सिंड्रोम’ के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। खासकर 14 से 24 वर्ष के किशोर और युवा इस समस्या की चपेट में आ रहे हैं।
पीबीएम अस्पताल से जुड़े चुन्नीलाल सोमानी राजकीय ट्रॉमा सेंटर के प्रभारी एवं अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. बीएल खजोटिया के अनुसार, 2023 में इस समस्या के 125 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि इस वर्ष के शुरुआती ढाई महीनों में ही 340 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से 209 मरीज 14 से 24 वर्ष की आयु के हैं।
मामले तेजी से बढ़ रहे हैं
ट्रॉमा सेंटर के सीएमओ डॉ. एलके कपिल के अनुसार, हर हफ्ते 5 से 7 नए मरीज ओपीडी में आ रहे हैं। गर्दन और ऊपरी पीठ दर्द के मामले पिछले वर्ष की तुलना में 15-20% तक बढ़े हैं।
फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. हेमंत व्यास के अनुसार, सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के मामलों में भी वृद्धि हो रही है। फिजियोथेरेपिस्ट विनय गर्ग का कहना है कि सही पोश्चर और नियमित ब्रेक इस समस्या से बचाव में सहायक हो सकते हैं।
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टेक्स्ट नेक के दो गंभीर मामले
केस 1: 12 वर्षीय छात्र पवन (बदला हुआ नाम) को टेक्स्ट नेक सिंड्रोम हो गया। कारण- मोबाइल और लैपटॉप का अधिक उपयोग और लंबे समय तक झुकी हुई मुद्रा में बैठना।
केस 2: यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहे रौचक सैनी मायोफेशियल सिंड्रोम से पीड़ित हो गए, जिससे वह दो वर्षों तक पढ़ाई जारी नहीं रख सके।
लक्षण
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गर्दन और कंधों में दर्द
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सिरदर्द और गर्दन में अकड़न
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बाहों में झुनझुनी या सुन्नपन
सावधानियां और बचाव के उपाय
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मोबाइल को आंखों के स्तर पर रखें।
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हर 20-30 मिनट में ब्रेक लें और गर्दन व कंधों को स्ट्रेच करें।
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बैठने की सही मुद्रा अपनाएं और स्क्रीन टाइम सीमित करें।
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जरूरत पड़ने पर चिकित्सक या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लें।