

सरकारी अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं, जिससे वे निजी प्रैक्टिस के दौरान मरीजों से अधिक शुल्क न वसूलें और चिकित्सा सेवाओं को पारदर्शी रखा जाए। लेकिन इन नियमों की अधिकांश सरकारी डॉक्टर खुलेआम अवहेलना कर रहे हैं। इससे न सिर्फ मरीजों और उनके परिवारों का आर्थिक शोषण हो रहा है, बल्कि सरकारी निर्देशों की खुलेआम धज्जियां भी उड़ रही हैं।
कैसे हो रही है मनमानी?
🔹 निजी क्लिनिक पर मेडिकल स्टोर खोलकर मनमानी दरों पर दवाइयां बेची जा रही हैं।
🔹 नियमों से अधिक फीस वसूलकर मरीजों से अवैध रूप से पैसे लिए जा रहे हैं।
🔹 ऐसी जांचें करवाई जा रही हैं, जो क्लिनिक में संभव ही नहीं हैं।
🔹 चुनिंदा लैब्स से जांच कराने के लिए मरीजों को बाध्य किया जा रहा है।
सरकार के नियम क्या कहते हैं?
सरकार द्वारा तय किए गए नियमों के अनुसार:
✔️ सरकारी चिकित्सकों को सरकारी निर्देशों के तहत ही कार्य करना होगा।
✔️ निजी प्रैक्टिस के दौरान अधिक शुल्क वसूलना या मनमानी करना प्रतिबंधित है।
✔️ नियमों के उल्लंघन पर सख्त विभागीय कार्यवाही का प्रावधान है।
कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, PBM अस्पताल सहित कई अन्य सरकारी हॉस्पिटलों में डॉक्टरों की मनमानी जारी है। प्रशासनिक लापरवाही और जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण यह अवैध प्रैक्टिस फल-फूल रही है।
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गरीब मरीजों का शोषण जारी
⚠️ सरकारी अस्पतालों में आने वाले अधिकांश मरीज आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं, जो सरकारी सुविधाओं पर निर्भर रहते हैं। लेकिन डॉक्टरों की यह मनमानी उन्हें आर्थिक रूप से और कमजोर बना रही है।
अब क्या होना चाहिए?
✅ सरकार को कड़े कदम उठाने होंगे, ताकि मरीजों का शोषण रुके।
✅ नियम तोड़ने वाले डॉक्टरों पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।
✅ सरकारी अस्पतालों में सतर्कता और निगरानी बढ़ाई जानी चाहिए।
सरकारी अस्पतालों में मरीजों से अवैध वसूली और नियमों की अनदेखी पर जल्द एक्शन नहीं लिया गया, तो यह चिकित्सा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करेगा।