उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से कैसरगंज लोकसभा सीट वर्तमान में सबसे ज़्यादा चर्चा में है.
दरअसल, महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न के आरोपों का कोर्ट में सामना कर रहे भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह इस सीट से बीजेपी के सांसद हैं.
दूसरी सबसे बड़ी वजह ये है कि बीजेपी समेत अन्य विपक्षी दलों ने अब तक इस सीट के लिये अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है.
बीजेपी उत्तर प्रदेश में अपने सहयोगी दलों के लिए पांच सीट छोड़कर बाक़ी 75 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. 73 सीटों पर बीजेपी प्रत्याशियों की घोषणा कर चुकी है लेकिन रायबरेली और कैसरगंज सीट के लिये प्रत्याशियों की घोषणा अब तक नहीं हुई है.
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कैसरगंज लोकसभा सीट से प्रत्याशी की घोषणा करने में बीजेपी का आलाकमान देरी क्यों कर रहा है, इसको लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं.
राज्य की राजनीति पर नज़र रखने वाले ज़्यादातर विश्लेषकों का यही कहना है कि पार्टी बृजभूषण शरण सिंह पर अब तक कोई फ़ैसला नहीं कर सकी है.
‘दो चरण खत्म होने का इंतज़ार कर रही थी बीजेपी’
वरिष्ठ पत्रकार नवलकांत सिन्हा कहते हैं, “महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न का आरोप झेल रहे बृजभूषण शरण सिंह की छवि को ही न केवल नुकसान पहुंचा है बल्कि इसके चलते भाजपा को भी बैकफुट पर रहना पड़ा था, चूंकि भाजपा की रणनीति हर सीट को जीतने की है इसलिये भाजपा कहीं न कहीं उत्तर प्रदेश में पहले और दूसरे चरण के चुनाव के बीत जाने का इंतज़ार कर रही थी क्योंकि इन्हीं दो चरणों में जाट बाहुल्य क्षेत्रों में चुनाव था जहां पर पार्टी को नुकसान होने की आशंका थी.”
अब जबकि दो चरणों का मतदान हो चुका है और कैसरगंज में नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया भी 26 अप्रैल से शुरू हो चुकी है, इलाके के मतदाताओं को उम्मीदवार के नाम का इंतज़ार है.
इस सीट पर नामांकन की प्रक्रिया तीन मई तक चलेगी. चार मई तक नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी और छह मई तक जो प्रत्याशी अपना नाम वापस लेना चाहेंगे, वो वापस ले सकते हैं.
कैसरगंज के लोग क्या कह रहे हैं?
कार्यक्रम में मौजूद बृजभूषण शरण के समर्थक मैन बहादुर सिंह अब तक टिकट नहीं मिलने के सवाल पर कहते हैं, “देरी क्यों हो रही है यह तो हमें नही पता लेकिन टिकट सांसद जी को मिलेगा. न मिलने का सवाल ही नहीं है, यह हो सकता है कि सांसद जी के परिवार से किसी को टिकट दे दिया जाए लेकिन टिकट तो इन्हीं के पास ही रहेगा.”
दरअसल, कैसरगंज की सीट के उम्मीदवार की अब तक घोषणा नहीं होने से ये कयास भी लगाया जा रहा है कि इस सीट से बृजभूषण शरण सिंह के बड़े बेटे या पत्नी को टिकट मिल सकता है.
कैसरगंज कस्बे में हमारी मुलाकात गोडहियां गांव के निवासी 55 वर्षीय सुंदरलाल यादव से हुई. वो अवधी अंदाज़ में कहते हैं, “टिकस तौ रायबरेली मा भी लटका हुवा है भैया, निशाखतिर (निश्चिंत) रहौ, टिकस भईया (बृजभूषण सिंह) का ही मिली.”

