चीन ने आधुनिक युद्ध की चुनौतियों को देखते हुए अपनी सेना में एक बड़ा बदलाव किया है. पिछले एक दशक में किया गया, यह सबसे बड़ा बदलाव है.
बीबीसी मॉनिटरिंग के मुताबिक 19 अप्रैल को चीन ने एक नई सैन्य यूनिट बनाने की घोषणा की.
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक इस नई सैन्य यूनिट को इन्फॉरमेशन सपोर्ट फोर्स का नाम दिया गया है.
एजेंसी के मुताबिक एक कार्यक्रम के दौरान इस स्पेशल सैन्य यूनिट की घोषणा की गई है. इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ केंद्रीय सैन्य आयोग के कई वरिष्ठ सदस्य शामिल थे.
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शी जिनपिंग, केंद्रीय सैन्य आयोग के चेयरमैन हैं. उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों से कहा कि यह स्पेशल यूनिट सेना की एक रणनीतिक इकाई होगी, जिसका काम नेटवर्क इन्फॉरमेशन सिस्टम को मजबूत करना होगा.
उन्होंने यूनिट से वफादारी की मांग करते हुए कहा कि वह पार्टी के आदेश को दृढ़ता से सुनें और सेना के पूर्ण नेतृत्व के सिद्धांत और प्रणाली को लागू करे ताकि ये सुनिश्चित हो सके कि यह यूनिट वफादार और विश्वसनीय है.
समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक पिछली बार जब सेना में बड़ा सुधार किया गया था तो 31 दिसंबर, 2015 को बनी स्ट्रेटजिक सपोर्ट फोर्स को भंग कर दिया गया था. इसके तहत एयरोस्पेस और साइबर यूनिट, इन्फॉरमेशन सपोर्ट फोर्स के समानांतर काम कर रही हैं.
चीनी रक्षा मंत्रालय ने नई यूनिट के गठन पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की. प्रवक्ता वू कियान ने कहा कि नए सुधार के तहत अब पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के पास चार सर्विसेज हैं, जिसमें सेना, नौसेना, वायु सेना और रॉकेट फोर्स शामिल हैं.
उन्होंने बताया कि चार सर्विसेज के अलावा पीएलए के पास चार आर्म्स भी हैं, जिसमें एयरोस्पेस फोर्स, साबइरस्पेस फोर्स, इन्फॉरमेशन सपोर्ट फोर्स और ज्वाइंट लॉजिस्टिक सपोर्ट फोर्स शामिल हैं.
प्रवक्ता वू ने बताया कि एयरोस्पेस फोर्स की मदद से चीन अंतरिक्ष में खुद को मजबूत करेगा, जबकि साइबरस्पेस फोर्स, देश को साइबर हमलों से बचाएगी और डेटा की सुरक्षा करने में मदद करेगी.
हालांकि उन्होंने नई यूनिट के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी. सेना के अख़बार पीएलए डेली ने कहा कि आधुनिक युद्ध में जीत सूचना पर निर्भर करती है, ऐसी स्थिति में जिसके पास बेहतर जानकारी होगी वह युद्ध में बढ़त हासिल करेगा.

