मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध जैसे हालात का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला। सप्ताह के कारोबारी दिन की शुरुआत ही भारी गिरावट के साथ हुई, जहां निवेशकों में घबराहट साफ नजर आई। बिकवाली के दबाव में प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट दर्ज की गई और कुछ ही घंटों में निवेशकों की करीब 12 लाख करोड़ रुपये की पूंजी स्वाहा हो गई।
सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट
Bombay Stock Exchange का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 1710 अंकों की गिरावट के साथ 78,528 के स्तर पर खुला। शुरुआती कारोबार में यह 2 प्रतिशत से अधिक फिसल गया।
वहीं National Stock Exchange का निफ्टी सूचकांक भी 500 अंकों से ज्यादा टूटकर 24,349 के आसपास कारोबार करता दिखा। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
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बीएसई के शेयरों का हाल
30 में से 27 शेयर लाल निशान पर कारोबार करते दिखे, जबकि केवल 3 शेयरों में मामूली बढ़त रही।
सबसे अधिक गिरावट जिन कंपनियों में दर्ज की गई, उनमें शामिल हैं:
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लार्सन एंड टुब्रो – 7 प्रतिशत से अधिक गिरावट
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टाटा स्टील – 5 प्रतिशत से ज्यादा
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इंडिगो – करीब 5 प्रतिशत
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अल्ट्राटेक सीमेंट – 4 प्रतिशत से अधिक
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टाइटन – लगभग 4 प्रतिशत
इसके अलावा बजाज फिनसर्व, बजाज फाइनेंस, अडानी पोर्ट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एनटीपीसी, एशियन पेंट्स, रिलायंस, एक्सिस बैंक, मारुति, एसबीआई, पावरग्रिड, ट्रेंट, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, कोटक बैंक, एयरटेल, एचयूएल, सनफार्मा, आईटीसी, टीसीएस और बीईएल जैसे दिग्गज शेयर भी दबाव में रहे।
आईटी सेक्टर में सीमित राहत देखने को मिली, जहां इन्फोसिस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक जैसे शेयर अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करते नजर आए।
सेक्टोरल इंडेक्स में बिकवाली
सेक्टोरल सूचकांकों में भी लगभग सभी सेक्टर लाल निशान पर रहे।
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निफ्टी मेटल में करीब 3.80 प्रतिशत की गिरावट
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निफ्टी ऑटो में लगभग 3 प्रतिशत
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निफ्टी पीएसयू बैंक में 3.38 प्रतिशत
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निफ्टी रियल्टी में 2.92 प्रतिशत
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निफ्टी ऑयल एंड गैस में 3.12 प्रतिशत
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निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 3.24 प्रतिशत
फार्मा, मीडिया, हेल्थकेयर और फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स भी गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे। केवल निफ्टी आईटी इंडेक्स में हल्की बढ़त दर्ज की गई।
गिरावट की बड़ी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता ने वैश्विक बाजारों में जोखिम बढ़ा दिया है। विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है।
तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई और चालू खाते के घाटे की चिंता बढ़ सकती है, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगाया है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत
बाजार जानकारों का मानना है कि मौजूदा गिरावट घबराहट में की गई बिकवाली का परिणाम है। यदि वैश्विक हालात स्थिर होते हैं तो बाजार में सुधार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल निवेशकों को सतर्क रणनीति अपनाने और दीर्घकालिक नजरिए के साथ निवेश करने की सलाह दी जा रही है।

