बीकानेर में जमीन हड़पने से जुड़े एक गंभीर और चौंकाने वाले मामले में अदालत ने सख्त फैसला सुनाया है। मृत व्यक्ति को कागजों में जीवित दर्शाकर कृषि भूमि अपने नाम करवाने के मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट माधवी मोदी ने दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए सात-सात साल के कठोर कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है।
प्रकरण के अनुसार, वर्ष 1992 में माहीराम ने तहसील छतरगढ़ के चक 4 आरजेडी क्षेत्र में स्थित 25 बीघा कृषि भूमि इकरारनामे के माध्यम से खरीदी थी। उस समय भूमि गैर-खातेदारी होने के कारण मूल खातेदार कुरड़ाराम ने रूपाराम को मुख्तयार आम नियुक्त किया था, ताकि खातेदारी मिलने के बाद भूमि की रजिस्ट्री माहीराम के नाम करवाई जा सके।
वर्ष 2005 में कुरड़ाराम की मृत्यु हो गई, जिससे मुख्तयारनामा स्वतः निरस्त हो गया। इसके बावजूद रूपाराम ने अपने पुत्रों ओमप्रकाश और पूर्णाराम के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र रचा। आरोप है कि वर्ष 2008 में समाप्त हो चुके मुख्तयारनामा का दुरुपयोग करते हुए भूमि की रजिस्ट्री ओमप्रकाश के नाम करवा दी गई। रजिस्ट्री दस्तावेजों में झूठा उल्लेख किया गया कि कुरड़ाराम जीवित है और मुख्तयारनामा वैध है।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी रूपाराम की मृत्यु हो जाने के कारण उसके विरुद्ध कार्यवाही समाप्त कर दी गई, जबकि ओमप्रकाश और पूर्णाराम के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया जारी रही। परिवादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता योगेश रामावत ने सशक्त दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिनके आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को धोखाधड़ी, कूट रचना और आपराधिक षड्यंत्र का दोषी माना।
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अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मृत व्यक्ति के नाम से भूमि का बेचान करना न केवल कानून का गंभीर उल्लंघन है, बल्कि यह समाज में विश्वास को तोड़ने वाला संगठित अपराध है।

