

जालोर: सरकारी स्कूलों में शिक्षा स्तर सुधारने के लिए कई नवाचार किए जाते हैं, लेकिन जसवंतपुरा पीएमश्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय ने सामाजिक समरसता की दिशा में एक अनूठी पहल की है। यहां स्कूल बोर्ड, रजिस्टर और नोटबुक में जाति का कोई उल्लेख नहीं किया जाता, केवल नाम दर्ज होते हैं।
जातिवाद मिटाने की अनूठी पहल
वर्ष 2018-19 में तत्कालीन संस्था प्रधान विक्रमसिंह के कार्यकाल में यह पहल शुरू हुई थी, जो अब स्कूल का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। स्टाफ की सूची हो या संस्थापन सूचना बोर्ड, सिर्फ नाम और पदनाम दर्ज किए जाते हैं, जाति का उल्लेख नहीं किया जाता। इस पहल का प्रभाव यह हुआ कि विद्यार्थियों ने भी अपनी नोटबुक और किताबों पर केवल नाम लिखने की आदत डाल ली है।
गुणवत्ता बढ़ी, नामांकन हुआ दोगुना
जिले के बेहतरीन स्कूलों में शामिल जसवंतपुरा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में इस सकारात्मक बदलाव का असर यह हुआ कि 2018 से पहले जहां 500 विद्यार्थी थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 900 हो चुकी है। इनमें 500 से अधिक बालिकाएं अध्ययनरत हैं।

बिना भेदभाव शिक्षा पर जोर, 100% परीक्षा परिणाम
विद्यालय प्रशासन का मानना है कि बच्चों को जाति आधारित मानसिकता से दूर रखकर शिक्षा पर केंद्रित करने से बेहतरीन परिणाम मिले हैं। पिछले छह वर्षों में स्कूल का परीक्षा परिणाम लगभग 100% रहा है, जो इस पहल की सफलता को दर्शाता है।
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संस्था प्रधान का बयान
विद्यालय के कार्यवाहक संस्था प्रधान दिनेश विश्नोई ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों को समानता और शिक्षा के प्रति समर्पण की भावना विकसित करना था। उन्होंने कहा, “हमने यह कदम उठाया ताकि विद्यार्थी सिर्फ अध्ययन पर ध्यान दें, न कि किसी अन्य पहचान पर। इसके बेहद सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं।”