इसके बावजूद 25 अगस्त, 2015 को अहमदाबाद के जीएमडीसी मैदान में पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति की महाक्रांति रैली में लाखों लोग जुटे थे. इन लोगों की मांग पाटीदारों यानी पटेलों को ओबीसी में शामिल करने और आरक्षण देने की थी.
इस रैली का नेतृत्व हार्दिक पटेल ने किया जो उस समय केवल 22 वर्ष के थे. इस रैली ने हार्दिक पटेल को अचानक से राष्ट्रीय स्तर पर सुर्ख़ियों में ला दिया था.
इस आंदोलन ने गुजरात की राजनीति पर इतना असर डाला कि तत्कालीन मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल को इस्तीफ़ा देना पड़ा.
आंदोलन के बाद हुए 2017 के विधानसभा चुनावों में भाजपा को 99 सीटों के साथ मामूली बहुमत मिला था. तब हार्दिक पटेल राज्य में कांग्रेस का चेहरा बने हुए थे.
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एक समय हार्दिक पटेल को गुजरात कांग्रेस ने अपना कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था और 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रचार के लिए एक हेलीकॉप्टर भी दिया था, लेकिन बदलते समय के साथ हार्दिक पटेल आज बीजेपी से निर्वाचित विधायक हैं.
लेकिन हालात ये हैं कि 2024 लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने जिन 40 स्टार प्रचारकों की सूची बनाई है उसमें हार्दिक पटेल का नाम तक नहीं है.

