आंध्र प्रदेश, श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने सोमवार सुबह 10:17 बजे अपने वर्ष 2026 के पहले सैटेलाइट मिशन PSLV-C62/EOS-N1 को लॉन्च किया। इस मिशन के तहत कुल 15 सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजा गया, जिसमें सबसे खास अन्वेषा (EOS-N1) सैटेलाइट है।
हालांकि लॉन्च के कुछ समय बाद रॉकेट के फ्लाइट पाथ में बदलाव देखा गया। ISRO के चेयरमैन वी नारायणन ने कहा कि तीसरे स्टेज के अंत तक व्हीकल का प्रदर्शन उम्मीद के अनुरूप था, लेकिन उसके बाद मार्ग में असामान्यता दर्ज की गई। उन्होंने बताया कि इस बदलाव की विस्तृत जांच (detailed analysis) शुरू कर दी गई है।
अन्वेषा सैटेलाइट को सूर्य-समकालिक कक्षा (Sun Synchronous Orbit) में लगभग 600 किलोमीटर ऊंचाई पर स्थापित किया जाना है। इसे DRDO ने विकसित किया है और यह खुफिया व रिमोट सेंसिंग गतिविधियों के लिए एडवांस्ड इमेजिंग तकनीक से लैस है। HRS (Hyper Spectral Remote Sensing) तकनीक के जरिये यह सैटेलाइट मिट्टी, पौधों, वाहनों और छिपी हुई संरचनाओं की पहचान करने में सक्षम है।
इस मिशन में कुल 15 सैटेलाइट्स शामिल थे—7 भारतीय और 8 विदेशी (फ्रांस, ब्राजील, नेपाल, यूके)। यह पहली बार है जब भारतीय निजी कंपनियों ने PSLV मिशन में इतनी बड़ी भागीदारी निभाई। PSLV को दुनिया के सबसे भरोसेमंद लॉन्च वाहनों में गिना जाता है, जिसने पहले चंद्रयान-1, मंगलयान और आदित्य-L1 जैसे मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च किए हैं।
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इसरो ने अपने पोस्ट में लिखा कि PSLV-C62 ने मिशन लॉन्च कर लिया है, लेकिन रॉकेट के फ्लाइट पाथ में हुई अनपेक्षित गड़बड़ी की जांच जारी है। नारायणन ने कहा कि डेटा का एनालिसिस जारी है और जल्द ही विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, PSLV की विश्वसनीयता और इतिहास देखते हुए किसी भी सैटेलाइट मिशन के दौरान होने वाली छोटी तकनीकी गड़बड़ियां अपेक्षित हो सकती हैं, लेकिन इसकी जांच बेहद गंभीरता से की जाती है।

