पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच बढ़ा तनाव
पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। हाल ही में कोलकाता स्थित I-PAC कार्यालय में ईडी की कार्रवाई के बाद शुरू हुआ सियासी घमासान अब हिंसक घटनाओं तक पहुंचता नजर आ रहा है। शनिवार रात बीजेपी के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के काफिले पर कथित तौर पर हमला किए जाने से प्रदेश की राजनीति में नया बवाल खड़ा हो गया है।
मेदिनीपुर में काफिले पर हमले का आरोप
बीजेपी का आरोप है कि यह घटना पश्चिम मेदिनीपुर जिले के चंद्रकोना इलाके में हुई, जहां सुवेंदु अधिकारी के काफिले को रोककर लाठियों और डंडों से हमला किया गया। पार्टी ने इस हमले के पीछे तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कार्यकर्ताओं का हाथ होने का दावा किया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि हमले के दौरान अधिकारी की गाड़ी को भी नुकसान पहुंचाया गया।
पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि घटना के दौरान काफी देर तक हंगामा चलता रहा, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि हमले के बाद भी पुलिस की निष्क्रियता चिंता का विषय है और इससे कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
थाने में धरने पर बैठे सुवेंदु अधिकारी
घटना के विरोध में सुवेंदु अधिकारी चंद्रकोना पुलिस स्टेशन पहुंचे और वहीं धरने पर बैठ गए। उन्होंने पुलिस से तत्काल एफआईआर दर्ज करने और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। अधिकारी ने कहा कि चुनाव नजदीक हैं और टीएमसी भाजपा को राजनीतिक रूप से खत्म करने के लिए हिंसा का सहारा ले रही है।
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टीएमसी नेताओं पर सीधे आरोप
बीजेपी नेता ने दावा किया कि घटना के समय टीएमसी युवा विंग के अध्यक्ष और टीएमसी मजदूर संगठन से जुड़े नेता मौके पर मौजूद थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने पुलिस को शामिल लोगों के नाम भी बताए हैं, इसके बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही है।
केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार का हमला
केंद्रीय मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने भी इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र पूरी तरह कमजोर हो चुका है।
सोशल मीडिया पर साधा निशाना
डॉ. मजूमदार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि राज्य में लोकतंत्र के पतन पर अब बहस की जरूरत नहीं रह गई है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर तानाशाही रवैया अपनाने और पुलिस प्रशासन पर पक्षपातपूर्ण व अक्षम होने का आरोप लगाया।
चुनाव से पहले बढ़ती राजनीतिक टकराव
विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आएंगे, वैसे-वैसे पश्चिम बंगाल में राजनीतिक टकराव और तेज हो सकता है। इस घटना ने एक बार फिर राज्य की कानून-व्यवस्था और निष्पक्ष प्रशासन को लेकर बहस छेड़ दी है।

