

अजमेर स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में बसंत उत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। दरगाह के उत्तराधिकारी सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती, शाही कव्वाल और अन्य खादिमों ने बुलंद दरवाजा, सहन चिराग, संदली गेट होते हुए अहाता-ए-नूर तक जुलूस निकाला और ख्वाजा साहब की मजार पर पीले फूलों का गुलदस्ता पेश किया।
इस अवसर पर शाही कव्वालों ने अमीर खुसरो के मशहूर कलाम “क्या खुशी और ऐश का सामान लाती है बसंत, ख्वाजा मोइनुद्दीन के घर आज आती है बसंत” गाकर माहौल को भक्तिमय बना दिया।

दरगाह में बसंत उत्सव का खास महत्व है, जो गंगा-जमुनी तहजीब और सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक माना जाता है। यहां हिंदू-मुस्लिम एकता की झलक देखने को मिलती है, क्योंकि हजारों श्रद्धालु हर रोज दरगाह में जियारत के लिए आते हैं। ऐसे उत्सवों से ख्वाजा साहब की दरगाह को सद्भावना की मिसाल माना जाता है, जो भारतीय सनातन संस्कृति से भी जुड़ी परंपराओं को सहेजकर रखती है।