

राजस्थान सरकार ने भजनलाल सरकार की बजट घोषणा के तहत नव प्रसारक नीति लागू की है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरीब कल्याण की सोच और पं. दीनदयाल उपाध्याय की अंत्योदय अवधारणा को साकार करना है।
- लक्ष्य: सरकारी योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की जानकारी हर व्यक्ति तक पहुंचाना।
- भूमिका: सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स का उपयोग जागरूकता बढ़ाने के लिए किया जाएगा।
नव प्रसारकों की श्रेणियां
सरकार ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को दो श्रेणियों में विभाजित किया है:
- श्रेणी A:
- 1 लाख या उससे अधिक सब्सक्राइबर/फॉलोअर्स वाले इन्फ्लुएंसर्स।
- जिला स्तर पर 1 नव प्रसारक और संभाग स्तर पर 2 मेंटर्स नियुक्त होंगे।
- श्रेणी B:
- 7,000 से 1 लाख तक सब्सक्राइबर/फॉलोअर्स वाले इन्फ्लुएंसर्स।
- जिला स्तर पर 1 नव प्रसारक और संभाग स्तर पर 1 मेंटर।
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की भूमिका
नव प्रसारकों को प्रशिक्षित करने के लिए सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा समर्थन प्रदान किया जाएगा।

- प्रशिक्षण क्षेत्र:
- कंटेंट क्रिएशन।
- वीडियो/ऑडियो एडिटिंग।
- SEO और सोशल मीडिया मैनेजमेंट।
- ब्रांडिंग और डिजिटलीकरण।
जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभाव
- यह नीति सरकार की योजनाओं को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समान रूप से पहुंचाने में सहायक होगी।
- सशक्तिकरण: इन्फ्लुएंसर्स को एक सशक्त माध्यम बनाकर उनकी स्किल्स को उभारा जाएगा।
- समाजसेवा और तकनीक का संगम: नव प्रसारक नीति समाजसेवा और तकनीकी ज्ञान का एक आदर्श संयोजन है।
नव प्रसारक नीति के जरिए संभावित लाभ
- योजनाओं की व्यापक पहुंच:
सरकारी योजनाओं की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी। - नवाचार को बढ़ावा:
डिजिटल स्किल्स के प्रशिक्षण से इन्फ्लुएंसर्स अपने प्लेटफ़ॉर्म को और प्रभावी बना सकेंगे। - युवाओं की भागीदारी:
युवा इन्फ्लुएंसर्स को जागरूकता अभियानों में शामिल कर सकारात्मक बदलाव लाने का मौका मिलेगा।
नोट:
इस पहल के तहत सोशल मीडिया का जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक है। गलत जानकारी फैलाने पर उचित निगरानी और कार्रवाई का भी प्रावधान हो।