

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को ब्रह्माकुमारीज संस्थान के शांतिवन में चार दिवसीय वैश्विक शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया। अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने विश्व शांति, अध्यात्म और पर्यावरणीय संकटों पर जोर देते हुए केंद्र सरकार की योजनाओं, जैसे स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन, और आयुष्मान भारत योजना की प्रशंसा की। उन्होंने सभी देशवासियों से वृक्षारोपण अभियान में भाग लेने का आह्वान भी किया और खुद भी एक पौधा रोपकर इस दिशा में कदम उठाया।
डायमंड हॉल में आयोजित “आध्यात्मिकता द्वारा स्वच्छ एवं स्वस्थ समाज” विषयक सम्मेलन को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि आज विश्व भर में अशांति का माहौल व्याप्त है और मानवीय मूल्यों में गिरावट देखी जा रही है। ऐसे समय में शांति और एकता की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि शांति केवल बाहरी दुनिया में नहीं, बल्कि हमारे अंतर्मन में बसती है, और जब हम आंतरिक रूप से शांत होते हैं तभी हम दूसरों के प्रति सहानुभूति और प्रेम का भाव रख सकते हैं।
राष्ट्रपति ने आध्यात्मिकता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इसका अर्थ केवल धार्मिक होना या सांसारिक कार्यों से दूर रहना नहीं है, बल्कि अपने आचरण और विचारों में शुद्धता लाना है। कर्मों का त्याग नहीं, बल्कि कर्मों में सुधार ही व्यक्ति को बेहतर इंसान बनाता है।
उन्होंने पर्यावरणीय संकट पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि दुनिया ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरणीय समस्याओं से जूझ रही है। मनुष्य को यह समझना होगा कि वह इस पृथ्वी का स्वामी नहीं है, बल्कि इसके संरक्षण के लिए जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि हमें इस ग्रह की रक्षा के लिए ट्रस्टी के रूप में कार्य करना चाहिए, न कि उसके मालिक के रूप में।
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इसके अलावा, राष्ट्रपति ने प्राकृतिक खेती और यौगिक खेती के महत्व को रेखांकित किया, जो स्वच्छ और स्वस्थ समाज के निर्माण में सहायक हो सकती हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जैसा भोजन होगा, वैसा ही मन और विचार होंगे।
समारोह के दौरान, राष्ट्रपति ने ब्रह्माकुमारीज संस्थान की भूमिका की सराहना की, जो आध्यात्मिकता के माध्यम से विश्व को सकारात्मक दिशा में ले जाने का कार्य कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सम्मेलन समाज में आध्यात्मिक मूल्यों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।