भारत ने गुरुवार को कहा है कि वो अमेरिकी विदेश विभाग उस रिपोर्ट को ख़ारिज करता है जिसमें कहा गया था कि मणिपुर में हुई हिंसा के दौरान मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ था.
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दिल्ली में पत्रकारों को बताया, “ये रिपोर्ट पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण है और भारत की स्थिति को ठीक से नहीं समझती. हम इसे कोई अहमियत नहीं देते हैं और आपसे भी गुज़ारिश करते हैं कि आप भी यही करें.”
बीते दिनों अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अलग-अलग देशों में मानवाधिकारों से जुड़े क़ानूनों के पालन की स्थिति को लेकर एक रिपोर्ट जारी की थी.
रिपोर्ट में भारत से जुड़े कई मामलों की ज़िक्र भी विस्तार से किया गया है. साथ ही ये भी कहा गया है कि भारत में तानाशाही बढ़ी है.
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रिपोर्ट के अनुसार, “इस बीच चीनी सरकार के दमनकारी लक्ष्यों को लेकर परेशानी बढ़ी है और ऑस्ट्रेलिया, जापान, कनाडा, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और अमेरिका ने भारत के साथ व्यापार और सुरक्षा संबंध बढ़ाए हैं जो दुनिया का सबसे बड़ा गणतंत्र है.”
रिपोर्ट में लिखा है, “लेकिन भारत में मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने चीन की सरकार के कई ऐसे दमनकारी तौर-तरीकों को अपनाया है. इनमें धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ सुनियोजित तरीके से भेदभाव करना, शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों का गला घोंटना और अभिव्यक्ति की आज़ादी को ख़त्म करने और सत्ता पर अपनी पकड़ बढ़ाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल शामिल है.”

