बीकानेर। पीबीएम अस्पताल में पेट दर्द की शिकायत लेकर पहुंचे 20 वर्षीय युवक की मौत के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच के लिए पांच डॉक्टरों की कमेटी गठित की है। पोस्टमार्टम मेडिकल बोर्ड से कराया गया और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई।
जानकारी के अनुसार सुभाषपुरा निवासी राजेंद्र राणा के 20 वर्षीय पुत्र भरत को बुधवार तड़के करीब चार बजे अचानक तेज पेट दर्द हुआ। परिजन उसे तुरंत पीबीएम अस्पताल लेकर पहुंचे। पहले उसे मेडिसिन कैजुअल्टी में दिखाया गया, जहां सोनोग्राफी के बाद ट्रॉमा सेंटर भेज दिया गया। ट्रॉमा सेंटर में एक्स-रे कराने के बाद किडनी में हाइड्रोनेफ्रोसिस की आशंका जताते हुए उसे यूरोलॉजी विभाग भेजा गया।
परिजनों के अनुसार यूरोलॉजी विभाग में डॉक्टर मुकेश आर्य को दिखाने की सलाह दी गई, जिसके बाद वे युवक को उनके घर ले गए। वहां से वापस ट्रॉमा सेंटर लाया गया, लेकिन तब तक सुबह करीब 11 बजे हो चुके थे। इसी दौरान युवक अचानक बेहोश होकर गिर पड़ा। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
युवक की मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पोस्टमार्टम कराने से मना कर दिया और मुर्दाघर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। गुरुवार सुबह सुभाषपुरा के बड़ी संख्या में लोग मोर्चरी के बाहर एकत्रित हो गए और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। घटना को लेकर सदर थाने में परिवाद भी दिया गया है।
- Advertisement -
मृतक के चाचा महावीर ने बताया कि भरत घर का एकमात्र कमाने वाला था और मजदूरी कर परिवार का गुजारा चलाता था। उन्होंने आरोप लगाया कि सात घंटे तक युवक को अस्पताल के विभिन्न विभागों के बीच घुमाया गया, लेकिन उसे भर्ती तक नहीं किया गया। उनका कहना है कि समय पर इलाज मिल जाता तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी।
भाजपा नेता श्याम सिंह हाड़ला ने बताया कि मामले को लेकर पीबीएम अधीक्षक से बातचीत की गई है। जांच के लिए कमेटी का गठन किया गया है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दिलाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

