मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने ईरान पर हुए हमलों को लेकर कड़ा बयान जारी किया है। अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई के बाद क्षेत्र में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद स्थिति और ज्यादा संवेदनशील हो गई है, जिसके चलते कई देशों में राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
इसी घटनाक्रम के बीच ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी करते हुए अमेरिका और इजरायल के हमले की स्पष्ट शब्दों में निंदा की है। बोर्ड ने कहा कि किसी भी देश के खिलाफ इस तरह की सैन्य कार्रवाई क्षेत्रीय शांति और वैश्विक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील
बोर्ड ने अपने बयान में संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करें। AIMPLB का कहना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए तत्काल युद्धविराम सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि मध्य पूर्व को एक बड़े और खतरनाक संघर्ष की ओर जाने से रोका जा सके।
बोर्ड के अनुसार यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह संकट व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।
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‘परमाणु वार्ता केवल बहाना थी’
AIMPLB के प्रवक्ता ने दावा किया कि ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही बातचीत में काफी प्रगति हो चुकी थी। यह वार्ता ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी की मध्यस्थता में हो रही थी और इसमें कई अहम मुद्दों पर सहमति बनने की बात कही जा रही थी।
प्रवक्ता के मुताबिक ईरान ने बातचीत के दौरान अमेरिका की कई प्रमुख शर्तों को स्वीकार कर लिया था। इसके बावजूद अचानक अमेरिका की ओर से वार्ता समाप्त करने की घोषणा कर दी गई और कुछ ही समय बाद इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमला कर दिया गया। बोर्ड का कहना है कि इस घटनाक्रम से यह संकेत मिलता है कि वार्ता का इस्तेमाल केवल एक रणनीतिक बहाने के रूप में किया गया।
भारत सरकार के रुख पर भी सवाल
AIMPLB ने इस मुद्दे पर भारत सरकार के रुख को लेकर भी चिंता जताई है। बोर्ड के प्रवक्ता ने कहा कि ऐसे संवेदनशील और निर्णायक समय में भारत एक संतुलित और सम्मानजनक मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता था।
उनका कहना है कि वर्तमान स्थिति में भारत की विदेश नीति की छवि पर असर पड़ सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत पर कोई आधिकारिक शोक संदेश जारी नहीं किया जाना भारत की पारंपरिक कूटनीतिक संवेदनशीलता के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
ईरान की जवाबी कार्रवाई
इधर इजरायल की सेना ने दावा किया है कि ईरान की ओर से उसके क्षेत्रों को निशाना बनाकर मिसाइलें दागी गई हैं। इजरायली एयर फोर्स के मुताबिक उनकी रक्षा प्रणाली इन मिसाइलों को रोकने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है।
सुरक्षा एजेंसियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे सरकार द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें और सुरक्षा उपायों को गंभीरता से लें। क्षेत्र में जारी सैन्य गतिविधियों के कारण हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।
मध्य पूर्व में बढ़ते इस संघर्ष को लेकर दुनिया भर की निगाहें अब आने वाले कूटनीतिक और सैन्य कदमों पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यह संकट वैश्विक राजनीति और सुरक्षा संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

