नेपाल में राजनीतिक हलचल के बीच आज देशभर में मतदान हो रहा है। पिछले साल जनरेशन Z के नेतृत्व में हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन प्रदर्शनों ने देश की राजनीति को झकझोर दिया था और उसी के बाद सरकार गिर गई थी। विरोध के दौरान हुई हिंसा में करीब 77 लोगों की मौत भी हुई थी। ऐसे माहौल में हो रहे इस चुनाव को नेपाल की नई राजनीतिक दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।
इस बार नेपाल की प्रतिनिधि सभा के 275 सदस्यों के चुनाव के लिए देशभर में मतदान कराया जा रहा है। करीब 1.89 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। चुनाव के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं और सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है।
चुनाव प्रक्रिया के तहत 165 सीटों पर प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली लागू है, जिनके लिए कुल 3,406 उम्मीदवार मैदान में हैं। वहीं 110 सीटों पर समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत 3,135 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। पूरे देश में मतदान के लिए 10,967 पोलिंग बूथ और 23,112 पोलिंग सेंटर बनाए गए हैं। सुबह 7 बजे शुरू हुई मतदान प्रक्रिया शाम 5 बजे तक जारी रहेगी।
नेपाल की राजनीति इस समय दो प्रमुख धड़ों में बंटी नजर आ रही है। एक तरफ वे राजनीतिक दल हैं जो पिछले साल हुए जनरेशन Z आंदोलन के प्रभाव को स्वीकार करते हुए बदलाव की बात कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर पारंपरिक राजनीतिक दल हैं, जो लंबे समय से देश की सत्ता में प्रभाव बनाए हुए हैं और स्थिरता पर जोर दे रहे हैं।
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पारंपरिक राजनीतिक धड़े में के.पी. शर्मा ओली की कम्युनिस्ट पार्टी (CPN-UML) और पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ के नेतृत्व वाली पार्टी को प्रमुख माना जा रहा है। वहीं राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के नेता रवि लामिछाने और नेपाली कांग्रेस के नेता गगन थापा खुद को नई पीढ़ी की उम्मीदों का प्रतिनिधि बताते हुए चुनाव मैदान में उतरे हैं।
इस चुनाव में कुछ नए राजनीतिक दल भी पहली बार सक्रिय रूप से सामने आए हैं। कुलमान घिसिंग की उज्यालो नेपाल पार्टी और हरका सम्पांग की श्रम शक्ति पार्टी जैसे नए समूह भी चुनाव लड़ रहे हैं। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन दलों का प्रभाव फिलहाल कुछ सीमित क्षेत्रों तक ही रहने की संभावना है।
प्रधानमंत्री पद को लेकर भी इस चुनाव में कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने पूर्व काठमांडू मेयर बालेन शाह को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया है। नेपाली कांग्रेस की ओर से गगन थापा को पीएम पद का चेहरा बनाया गया है। वहीं कम्युनिस्ट पार्टी (CPN-UML) की ओर से के.पी. शर्मा ओली फिर से प्रधानमंत्री पद की दौड़ में शामिल हैं।
नेपाल के इस चुनाव पर भारत की भी करीबी नजर बनी हुई है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से मजबूत राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और नेपाल का तीसरे देशों के साथ होने वाला अधिकांश व्यापार भारतीय बंदरगाहों और ट्रांजिट मार्गों के जरिए ही होता है।
इसके अलावा चीन का बढ़ता प्रभाव भी भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक मुद्दा बन गया है। भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा है, जिसे भारत के पांच राज्य साझा करते हैं। इस सीमा के कारण दोनों देशों के लोगों का आवागमन काफी आसान है, इसलिए नेपाल में राजनीतिक स्थिरता भारत के लिए सीमा सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिहाज से भी अहम मानी जाती है।
भारत ने नेपाल में कई आधारभूत ढांचे और विकास परियोजनाओं में निवेश किया है। ऐसे में काठमांडू में बनने वाली नई सरकार का रुख दोनों देशों के भविष्य के सहयोग और संबंधों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

