Disclaimer
यह लेख सामान्य धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक जानकारी पर आधारित है। हमारे पाठकों से निवेदन है कि व्रत रखने से पहले अपनी शारीरिक स्थिति और स्वास्थ्य का ध्यान रखें। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। धार्मिक विधि-विधान क्षेत्र और परंपरा के अनुसार भिन्न हो सकते हैं।
महाशिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित आस्था, तप और संयम का पर्व है। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखकर पूजा-अर्चना करते हैं। व्रत केवल भोजन का त्याग नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म की पवित्रता का संकल्प भी है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि महाशिवरात्रि के व्रत में क्या खाना चाहिए, क्या नहीं, और व्रत खोलने की सही विधि क्या है।
महाशिवरात्रि व्रत में क्या खा सकते हैं?
व्रत के दौरान सात्विक और फलाहारी भोजन को प्राथमिकता दी जाती है। ऐसे आहार का चयन करें जो हल्का, पचने में आसान और शुद्ध हो।
फल और दुग्ध उत्पाद
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मौसमी फल
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दूध, दही, छाछ
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पनीर
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मखाना खीर या भुना मखाना
व्रत में उपयोग होने वाले आटे
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कुट्टू का आटा (पूड़ी, पकौड़ी)
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सिंहाड़े का आटा
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राजगिरा (रामदाना)
अन्य फलाहारी विकल्प
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साबूदाना खिचड़ी या वड़ा
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उबले या जीरा-भुने आलू
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मूंगफली
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सूखे मेवे
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सेंधा नमक का प्रयोग
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देसी घी, जीरा, हरी मिर्च, टमाटर सीमित मात्रा में
यदि आप फलाहार व्रत कर रहे हैं तो चाय या कॉफी सीमित मात्रा में ले सकते हैं। हालांकि, निर्जला व्रत रखने वाले श्रद्धालु जल तक ग्रहण नहीं करते।
महाशिवरात्रि व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए?
व्रत के दिन तामसिक और अनाज आधारित भोजन से परहेज करना चाहिए।
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गेहूं, चावल, दालें
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लहसुन और प्याज
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साधारण नमक
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मांसाहार
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तला-भुना और अत्यधिक मसालेदार भोजन
संयमित आहार से शरीर हल्का रहता है और पूजा में मन एकाग्र रहता है।
महाशिवरात्रि व्रत के नियम
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प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
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व्रत का संकल्प लें और भगवान शिव का ध्यान करें।
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शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और फल अर्पित करें।
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“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
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क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
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रात्रि जागरण कर भजन-कीर्तन या ध्यान करना शुभ माना जाता है।
व्रत खोलने की सही विधि
अगले दिन प्रातः या निर्धारित शुभ मुहूर्त में व्रत खोलें। सबसे पहले भगवान शिव को प्रसाद अर्पित करें, उसके बाद स्वयं फलाहारी या हल्का सात्विक भोजन ग्रहण करें। व्रत खोलते समय अति भोजन से बचें।
आस्था के साथ स्वास्थ्य का भी रखें ध्यान
व्रत श्रद्धा का विषय है, लेकिन स्वास्थ्य की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। जिन लोगों को मधुमेह, रक्तचाप या अन्य गंभीर बीमारी है, वे चिकित्सकीय सलाह लेकर ही उपवास रखें।

