राजस्थान रोडवेज में लंबे समय से चल रहे भ्रष्टाचार की परतें उस समय खुल गईं, जब झालावाड़ पुलिस ने एक बड़े और संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया। ‘ऑपरेशन क्लीन राइड’ के तहत पुलिस ने ऐसे मुखबिर नेटवर्क को उजागर किया है, जो रोडवेज बस कंडक्टरों को विजिलेंस टीम की गतिविधियों की पहले से सूचना देकर सरकार को हर महीने करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा रहा था।
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क सिर्फ झालावाड़ तक सीमित नहीं था, बल्कि जयपुर, कोटा, अजमेर, चित्तौड़गढ़ सहित प्रदेश के कई बड़े जिलों तक फैला हुआ था।
यात्री बने सिपाही, हुआ हाई-रिस्क स्टिंग
करीब एक महीने पहले मिली गुप्त सूचना के बाद एसपी अमित कुमार के निर्देशन में प्रोबेशनर आरपीएस कमल कुमार के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। टीम के सिपाही हेमराज और केतन ने आम यात्री बनकर रोडवेज बसों में सफर किया और कंडक्टरों व गिरोह के बीच हो रही अवैध डीलिंग के गोपनीय वीडियो रिकॉर्ड किए। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली सामने आ सकी।
‘STD गिरोह’ नाम से थी पहचान
कंडक्टर इस गिरोह को ‘STD’ कोडवर्ड से जानते थे। पुराने समय में एसटीडी बूथ से सूचना देने की परंपरा के चलते यह नाम प्रचलन में आया। गिरोह के सदस्य फ्लाइंग टीम की गाड़ियों का पीछा करते और जैसे ही जांच किसी रूट पर जाती, तुरंत संबंधित कंडक्टरों को अलर्ट कर देते थे।
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कैसे लगाया जाता था सरकार को चूना
सूचना देने के बदले कंडक्टरों से रोजाना 1500 से 2000 रुपये तक वसूले जाते थे। यह रकम कंडक्टर अपनी जेब से नहीं, बल्कि यात्रियों को बिना टिकट यात्रा करवाकर वसूलते थे। पुलिस के अनुसार, इस कारण रोडवेज के राजस्व में करीब 40 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की जा रही थी।
एक साथ कई जिलों में दबिश
शुक्रवार को पुलिस ने प्रदेश के कई जिलों में एक साथ कार्रवाई करते हुए पार्षद नरेंद्र सिंह राजावत समेत 8 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से 12 लाख रुपये नकद, 3 लग्जरी कारें, 2 मोटरसाइकिल, 15 मोबाइल फोन, लैपटॉप, स्पाई कैमरा पेन, पोश मशीन, चेक बुक, एटीएम कार्ड, टिकट डायरी और रोडवेज की मोहरें जब्त की गई हैं।
फ्लाइंग टीम से मिलीभगत के संकेत
जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह की साठगांठ रोडवेज की कुछ फ्लाइंग टीमों से थी, जिन्हें नियमित रूप से हिस्सा दिया जाता था। टोंक, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा और अन्य जिलों से भी संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है।
अपराधों का लंबा रिकॉर्ड
गिरोह के सदस्य पहले भी कई आपराधिक मामलों में शामिल रहे हैं। वर्ष 2022 में यातायात प्रबंधक के साथ मारपीट और ईमानदार अधिकारियों को धमकाने के मामले सामने आ चुके हैं। मुख्य आरोपी नरेंद्र सिंह पर पहले से कई आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं।
रोडवेज सुधार की जरूरत
इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि रोडवेज को घाटे से निकालने के लिए केवल नई बसें या रूट नहीं, बल्कि ऐसे संगठित माफिया नेटवर्क का पूरी तरह सफाया जरूरी है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

