राजस्थान सरकार ने आंगनबाड़ी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम निर्णय लिया है। अब प्रदेश में किराए के भवनों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से पास के सरकारी स्कूलों में स्थानांतरित किया जाएगा। इस फैसले का उद्देश्य बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना और सरकारी संसाधनों का प्रभावी उपयोग करना है।
महिला एवं बाल विकास विभाग की तैयारी
महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस योजना पर काम शुरू कर दिया है। जिन आंगनबाड़ी केंद्रों को स्कूल परिसर में स्थानांतरित किया जा सकेगा, उन्हें सीधे वहां शिफ्ट किया जाएगा। जबकि जिन केंद्रों के लिए स्कूल में जगह उपलब्ध नहीं होगी, उनकी नजदीकी सरकारी स्कूलों से मैपिंग की जाएगी, ताकि बच्चों की आगे की शिक्षा में कोई रुकावट न आए।
दूरी के तय मानक
सरकार ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग-अलग दूरी के मानक तय किए हैं।
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शहरी इलाकों में एक किलोमीटर के दायरे में स्थित सरकारी स्कूलों में आंगनबाड़ी केंद्र जोड़े जाएंगे।
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ग्रामीण क्षेत्रों में यह दूरी 500 मीटर तक सीमित रखी गई है।
इस व्यवस्था से बच्चों और अभिभावकों दोनों को सुविधा मिलने की उम्मीद है।
जयपुर में सबसे अधिक किराए के केंद्र
प्रदेश में सबसे ज्यादा किराए के भवनों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र जयपुर जिले में हैं। यहां 1000 से अधिक केंद्र ऐसे हैं, जो छोटे और असुविधाजनक कमरों में चल रहे हैं। कई जगहों पर बच्चों के बैठने, खेलने और पढ़ने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, जिसे लेकर लंबे समय से शिकायतें मिलती रही हैं।
बच्चों को मिलेगा स्कूल जैसा माहौल
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, आंगनबाड़ी केंद्रों के स्कूल परिसरों में आने से उनकी निगरानी आसान होगी। साथ ही बच्चों को शुरुआत से ही स्कूल का वातावरण मिलेगा। छह वर्ष की आयु पूरी करने के बाद बच्चों को उसी स्कूल में प्रवेश देने की व्यवस्था भी की जाएगी, जिससे शिक्षा की निरंतरता बनी रहे।
सरकार का उद्देश्य
सरकार का मानना है कि इस बदलाव से आंगनबाड़ी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और प्रारंभिक शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। यह कदम न केवल बच्चों के भविष्य के लिए अहम है, बल्कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और अभिभावकों के लिए भी राहत लेकर आएगा।

