जयपुर। राजस्थान में जनगणना-2027 को लेकर तैयारियां औपचारिक रूप से शुरू हो गई हैं। इस बार जनगणना प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव किया गया है। पहली बार आम नागरिकों को सेल्फ सेंसस (स्व-गणना) का विकल्प दिया जाएगा, जिससे लोग खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे।
सांख्यिकी विभाग के अनुसार जनगणना का पहला चरण मकान सूचीकरण (House Listing) से जुड़ा होगा, जो 16 मई से 14 जून 2027 तक चलेगा। इससे पहले 1 मई से 15 मई तक सेल्फ सेंसस की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
पोर्टल और ऐप से होगी स्व-गणना
विभाग ने बताया कि सेल्फ सेंसस के लिए जल्द ही एक ऑनलाइन पोर्टल और मोबाइल ऐप लॉन्च किया जाएगा। नागरिक इसमें अपने मकान और परिवार से जुड़ी जानकारी स्वयं भर सकेंगे। इसके बाद जनगणना कर्मचारी इन जानकारियों का फील्ड वेरिफिकेशन करेंगे।
स्व-गणना पूरी होने के बाद सरकारी प्रगणक घर-घर जाकर मकान सूचीकरण का काम करेंगे।
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पहले फेज में सिर्फ मकानों की जानकारी
पहले चरण में केवल मकानों से संबंधित आंकड़े जुटाए जाएंगे। लोगों की व्यक्तिगत गणना और जातीय जनगणना दूसरे फेज में की जाएगी, जिसकी अधिसूचना बाद में अलग से जारी होगी। यह पहली बार होगा जब राष्ट्रीय स्तर पर जातीय जनगणना भी शामिल की जाएगी।
15 महीने तक कर्मचारियों के ट्रांसफर पर रोक
जनगणना कार्य को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। जनगणना पूरी होने तक, यानी करीब 15 महीनों तक, कई श्रेणियों के अधिकारियों और कर्मचारियों के ट्रांसफर पर रोक रहेगी।
इसमें कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार, शिक्षक, पटवारी और ग्राम सचिव शामिल हैं।
इस अभियान में करीब 2 लाख अधिकारी-कर्मचारी और लगभग 1.60 लाख प्रगणक तैनात किए जाएंगे।
पहले फेज में पूछे जाएंगे 33 सवाल
केंद्र सरकार ने पहले चरण के लिए 33 प्रश्न तय किए हैं। इनमें मकान और सुविधाओं से जुड़ी जानकारी ली जाएगी, जैसे—
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मकान पक्का है या कच्चा
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फर्श, दीवार और छत में उपयोग की गई सामग्री
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पीने के पानी और बिजली की सुविधा
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शौचालय और गंदे पानी की निकासी
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रसोईघर, एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन
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मोबाइल, इंटरनेट, टीवी, कंप्यूटर
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वाहन और उपयोग में आने वाले मुख्य अनाज
मोबाइल नंबर केवल जनगणना से जुड़े संप्रेषण के लिए लिया जाएगा।
पारदर्शी और तकनीक-आधारित जनगणना की दिशा में कदम
राजस्थान में मई से शुरू हो रही यह प्रक्रिया सरकार और आमजन की साझा भागीदारी से जनगणना को अधिक पारदर्शी, सटीक और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

