नई दिल्ली। देश की सुरक्षा को लेकर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने एक व्यापक और विचारोत्तेजक दृष्टिकोण सामने रखा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को केवल सेना या हथियारों तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता, बल्कि यह तीन आपस में जुड़े घेरों पर आधारित एक समग्र व्यवस्था है।
दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान सीडीएस जनरल चौहान ने अपनी पुस्तक का उल्लेख करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा की इस अवधारणा को विस्तार से समझाया।
तीन घेरों में बंटी है राष्ट्रीय सुरक्षा
जनरल अनिल चौहान के अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा का सबसे बाहरी घेरा समग्र सुरक्षा से जुड़ा होता है, जिसमें देश की आंतरिक स्थिरता, अर्थव्यवस्था, सामाजिक संतुलन और कूटनीति शामिल होती है।
इसके भीतर का दूसरा घेरा रक्षा व्यवस्था से संबंधित है, जिसका उद्देश्य संभावित खतरों से देश को सुरक्षित रखना है।
सबसे अंदर का और सबसे छोटा घेरा सैन्य तैयारी और क्षमता को दर्शाता है, जो सीधे तौर पर सशस्त्र बलों से जुड़ा होता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ये तीनों स्तर एक-दूसरे से जुड़े हैं और अलग-अलग नहीं, बल्कि एक साथ मिलकर देश की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
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सैन्य इतिहास और INA का उल्लेख
सीडीएस ने भारतीय सैन्य इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि जब वे मध्य स्तर के अधिकारी थे, तब पढ़ाया जाने वाला सैन्य इतिहास मुख्य रूप से ब्रिटिश लेखकों द्वारा लिखा गया था।
उन्होंने इंडियन नेशनल आर्मी (INA) यानी आजाद हिंद फौज का उदाहरण देते हुए बताया कि इस सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ा था, जिसे किसी भी सैन्य संगठन में असाधारण माना जाता है।
एकता और विविधता की मिसाल थी INA
जनरल चौहान ने कहा कि INA केवल एक सैन्य बल नहीं थी, बल्कि एकता और विविधता का प्रतीक भी थी। इसमें देश के अलग-अलग क्षेत्रों, जातियों, धर्मों और यहां तक कि महिलाओं की भी भागीदारी थी। यह भारत की समावेशी सोच को दर्शाता है।
भूमि, जनता और विचारधारा भी सुरक्षा का हिस्सा
सीडीएस ने कहा कि समय के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा की परिभाषा बदली है। आज इसका मतलब केवल सीमाओं की रक्षा नहीं है, बल्कि देश की भूमि, देश की जनता और देश की विचारधारा को सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक समाज और विचार मजबूत नहीं होंगे, तब तक सैन्य ताकत अकेले राष्ट्रीय सुरक्षा की गारंटी नहीं बन सकती।

