बीकानेर की पारिवारिक अदालत ने एक तलाक मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए पत्नी के कथित प्रेमी को प्रकरण में आवश्यक पक्षकार माना है। पारिवारिक न्यायालय संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी अशोक चौधरी ने आदेश 1 नियम 10 सहपठित धारा 151 सीपीसी के तहत दायर आवेदन को स्वीकार कर प्रेमी को मामले में शामिल करने और उसे रजिस्टर्ड नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।
सुनवाई के दौरान पति की ओर से न्यायमित्र अधिवक्ता अनिल सोनी उपस्थित रहे, जबकि पत्नी की अनुपस्थिति में न्यायालय ने एकपक्षीय कार्यवाही की। पति द्वारा दायर प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया कि पत्नी अन्य पुरुषों से लगातार फोन पर बातचीत करती थी, जिससे उसे सामाजिक अपमान झेलना पड़ा। पत्नी की गुमशुदगी की रिपोर्ट के बाद पुलिस की मदद से वह एक युवक के साथ थाने पहुंची, जहां उसने पति से नफरत और युवक से प्रेम विवाह की बात स्वीकार की।
पति ने यह भी बताया कि पत्नी उक्त युवक के साथ दिल्ली सहित अन्य शहरों में रह रही है और सोशल मीडिया पर दोनों स्वयं को पति-पत्नी बताकर तस्वीरें साझा कर रहे हैं। ऐसे में वास्तविक तथ्यों के खुलासे के लिए कथित प्रेमी को पक्षकार बनाना आवश्यक बताया गया।
वहीं पत्नी की ओर से दायर जवाब में इस आवेदन को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए कहा गया कि वैवाहिक विवाद केवल पति-पत्नी के बीच का विषय है और किसी तीसरे व्यक्ति को इसमें शामिल करना कानूनन उचित नहीं है।
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दोनों पक्षों के दस्तावेज, सोशल मीडिया फोटो, शपथपत्र और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने माना कि कथित प्रेमी मामले का महत्वपूर्ण पक्ष है। इसी आधार पर उसे अप्रार्थी संख्या-2 के रूप में जोड़े जाने का आदेश दिया गया।

