नई दिल्ली। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने कहा है कि भारत को अपने अतीत से सबक लेते हुए भविष्य की दिशा तय करनी होगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “बदला” किसी से हिंसा के रूप में नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण के जरिए लिया जाना चाहिए। डोभाल यह बातें ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ के उद्घाटन सत्र में युवाओं को संबोधित करते हुए कही।
एनएसए डोभाल ने भारत की सभ्यता और इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति कभी आक्रामक नहीं रही। उन्होंने कहा कि भारत ने न तो किसी के मंदिर तोड़े, न ही दूसरे देशों को लूटा और न ही किसी पर आक्रमण किया। इसके बावजूद, इतिहास में ऐसे दौर आए जब हम अपने सामने खड़े खतरों को पहचान नहीं पाए और उदासीन बने रहे, जिसकी भारी कीमत देश को चुकानी पड़ी। उन्होंने युवाओं से सवाल किया कि क्या आने वाली पीढ़ियां इन सबकों को याद रखेंगी या फिर भूल जाएंगी।
युवाओं से सीधा संवाद
अपने संबोधन में डोभाल ने कहा कि युवाओं और उनके बीच उम्र का बड़ा अंतर है, फिर भी वे उनसे संवाद करना चाहते थे। उन्होंने बताया कि उनका जन्म आज़ाद भारत से पहले हुआ और उन्होंने देश को संघर्ष के दौर से निकलते देखा है। डोभाल के अनुसार, समय के साथ बहुत कुछ बदल गया है, लेकिन एक बात हमेशा समान रहती है—निर्णय लेने की क्षमता। यही क्षमता किसी व्यक्ति और राष्ट्र के भविष्य की दिशा तय करती है।
‘भारत का विकसित होना तय है’
डोभाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि देश आज ऐसे मुकाम पर पहुंच चुका है कि यदि यह अपनी मौजूदा दिशा में आगे बढ़ता रहा, तो भी विकसित भारत बनना तय है। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत का भविष्य उज्ज्वल है और युवा इसमें सबसे बड़ी भूमिका निभाएंगे।
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शक्ति और आत्मविश्वास का महत्व
एनएसए ने कहा कि दुनिया में होने वाले अधिकतर युद्ध और संघर्ष इस कारण होते हैं कि कुछ देश दूसरों पर अपनी इच्छा थोपना चाहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वतंत्र रहने के लिए शक्तिशाली होना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है आत्मविश्वास। आत्मविश्वास के बिना हथियार और संसाधन भी निरर्थक हो जाते हैं। उन्होंने नेतृत्व की भूमिका को समझाते हुए नेपोलियन के कथन का उदाहरण दिया।
भारत का आर्थिक इतिहास
डोभाल ने ‘विश्व अर्थव्यवस्था का इतिहास’ पुस्तक का उल्लेख करते हुए बताया कि लंबे समय तक भारत और चीन वैश्विक अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करते रहे। उन्होंने कहा कि भारत कभी विज्ञान, तकनीक और अर्थव्यवस्था में शिखर पर था, लेकिन पतन भी हुआ। इससे यह स्पष्ट होता है कि राष्ट्र को मजबूत बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास जरूरी हैं।
शहीदों के बलिदान का स्मरण
एनएसए डोभाल ने स्वतंत्रता संग्राम के नायकों को याद करते हुए कहा कि आज का भारत अनगिनत बलिदानों के बाद बना है। भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस और महात्मा गांधी जैसे नेताओं के संघर्षों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इतिहास हमें चुनौती देता है। अंत में उन्होंने कहा कि बदला लेना भले ही कठोर शब्द लगे, लेकिन अपने मूल्यों पर आधारित एक महान और विकसित भारत का निर्माण ही सच्चा जवाब है।

