पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में अवैध नाम जोड़ने का मामला सामने आने के बाद चुनाव आयोग (EC) ने कड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को दोषी अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में कुल पांच अधिकारियों का नाम शामिल है, जिन्होंने कथित तौर पर मतदाता सूची में अनधिकृत तरीके से नाम जोड़े।
अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई
चुनाव आयोग ने निर्देश दिए हैं कि संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) तुरंत कार्रवाई करें और FIR दर्ज कर आरोपी अधिकारियों के खिलाफ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950, BNS 2023, और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के प्रावधानों के तहत कानूनी कदम उठाएं। आयोग ने चेतावनी दी है कि FIR न दर्ज करने की स्थिति में CEO के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्रवाई के तहत पहले ही मतदाता सूची से छेड़छाड़ और डेटा सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में पांच अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है। इसमें दो निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) और दो सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (AERO) शामिल हैं। अधिकारियों पर अपने कर्तव्यों की उपेक्षा और ER डेटाबेस के लॉगिन क्रेडेंशियल को अनधिकृत व्यक्तियों के साथ साझा करने के आरोप भी लगे थे।
नोटिस क्यों भेजा गया
चुनाव आयोग ने यह नोटिस इसलिए भेजा क्योंकि 20 अगस्त 2025 को अधिकारियों को निलंबित करने के बावजूद FIR दर्ज करने के निर्देश का पालन नहीं हुआ था। आयोग ने CEO को स्पष्ट किया कि निर्दिष्ट अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करना अनिवार्य है और इसकी अनुपालन रिपोर्ट जल्द-से-जल्द जमा करनी होगी।
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निलंबित अधिकारियों की जानकारी
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दक्षिण 24 परगना: ERO देबोत्तम दत्ता चौधरी, AERO तथागत मंडल, और डेटा एंट्री ऑपरेटर सुरोजित हलदर
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पुरबा मेदिनीपुर: ERO बिप्लब सरकार और EERO सुदीप्त दास
चुनाव आयोग ने जोर देकर कहा है कि मतदाता सूची में छेड़छाड़ और डेटा सुरक्षा उल्लंघन गंभीर अपराध हैं और इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को खतरा हो सकता है। इसलिए सभी संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह कदम पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने और मतदाता सूची की विश्वसनीयता बनाए रखने की दिशा में उठाया गया है।

