जयपुर में शिव मंदिर को अतिक्रमण बताकर नोटिस, विरोध के बाद प्रवर्तन अधिकारी निलंबित
राजधानी जयपुर में वैशाली नगर इलाके में सड़क चौड़ीकरण अभियान के दौरान सामने आए विवाद ने बड़ा रूप ले लिया है। जेडीए द्वारा भगवान शिव मंदिर को अतिक्रमण मानकर सीधे मंदिर के नाम नोटिस जारी करने के मामले में प्रवर्तन अधिकारी अरुण कुमार पूनिया को निलंबित कर दिया गया है। जेडीए सचिव निशांत जैन ने शुक्रवार को पूनिया के निलंबन आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार देय भत्ता मिलता रहेगा। उनका मुख्यालय एडीजीपी (कार्मिक) कार्यालय, जयपुर निर्धारित किया गया है।
सड़क चौड़ीकरण अभियान में हुई थी गलती
वैशाली नगर के गांधी पथ पर सड़क विस्तार कार्य के दौरान जेडीए टीम ने दुकानों, मकानों और अन्य निर्माणों को अतिक्रमण मानकर नोटिस लगाए थे। इसी क्रम में सड़क किनारे स्थित भगवान शिव मंदिर को भी अवैध निर्माण की श्रेणी में डाल दिया गया।
सबसे बड़ी त्रुटि यह रही कि नोटिस किसी व्यक्ति, ट्रस्ट या समिति के नाम नहीं, बल्कि सीधे “शिव मंदिर” के नाम जारी किया गया। नोटिस में सात दिनों के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश भी शामिल थे।
स्थानीय लोगों ने किया विरोध
नोटिस चस्पा होने के बाद क्षेत्र के लोगों ने इसका कड़ा विरोध किया। लोगों का कहना था कि धार्मिक स्थल को बिना उचित जांच और बिना संबंधित जिम्मेदार संस्था से संपर्क किए अतिक्रमण घोषित करना गंभीर लापरवाही है। विरोध बढ़ता देख जेडीए प्रशासन ने मामले की समीक्षा की और प्रवर्तन अधिकारी को निलंबित कर दिया।
जेडीए पर सवाल, जांच आगे बढ़ेगी
इस घटना ने जेडीए की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। उच्च अधिकारियों का कहना है कि अतिक्रमण कार्रवाई स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया और दस्तावेजी जांच के बाद ही की जानी चाहिए। निलंबन के बाद अब यह भी जांच की जाएगी कि नोटिस जारी करने में प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया।
