

बार्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के इंस्पेक्टर अबसार अहमद के साथ हुई साइबर ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। उन्हें डिजिटल तरीके से 29 दिनों तक मानसिक रूप से कैद रखा गया और 71 लाख रुपए की ठगी की गई। घटना की शुरुआत 2 दिसंबर को हुई, जब मुंबई साइबर सेल का अधिकारी बनकर एक ठग ने इंस्पेक्टर अहमद को कॉल किया।
डराने-धमकाने की साजिश
ठग ने इंस्पेक्टर को बताया कि वे मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य अपराधों में शामिल हैं। यहां तक कि उनके मोबाइल नंबर और आधार कार्ड से भी अपराध होने की बात कही। उनके पूरे परिवार को भी जेल भेजने की धमकी दी गई। इसके बाद ठगों ने उनसे कई किस्तों में पैसे की मांग की।
संपत्ति बेचकर पैसे जुटाए
पहले बैंक खातों की सारी रकम ठगों के खातों में ट्रांसफर करवाई गई। इसके बाद फ्लैट और जमीन बेचकर, रिश्तेदारों और दोस्तों से उधार लेकर, कुल मिलाकर 71 लाख रुपए ठगों को दिए गए।
ठगों का शातिर जाल
ठगों ने विश्वास बनाए रखने के लिए 94,998 रुपए लौटाए और कहा कि अगर वे दोषी नहीं निकले, तो सारी रकम वापस कर दी जाएगी। इंस्पेक्टर को पूरी तरह मानसिक दबाव में रखकर किसी से संपर्क करने से रोका गया।
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परिवार को हुआ शक
घटना का खुलासा तब हुआ, जब इंस्पेक्टर अहमद ने तीन दिन पहले अपने बेटे अशरफ को परेशानी बताई। इसके बाद परिवार ने साइबर सेल में शिकायत दर्ज करवाई।
जांच जारी
एसपी ग्वालियर धर्मवीर सिंह यादव के अनुसार, ठगों ने वीडियो कॉल पर खुद को वर्दी में पुलिस अधिकारी बताते हुए इंस्पेक्टर को डराया। इस मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
यह मामला साइबर अपराध के बढ़ते खतरे और जागरूकता की कमी को उजागर करता है। अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि ऐसे कॉल्स से सावधान रहें और किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत पुलिस को सूचित करें।