बीकानेर में न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी की है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-01, बीकानेर ने 10 अप्रैल 2026 को सुनवाई के दौरान पुलिस थाना बीछवाल के थानाधिकारी दिगपाल चारण पर गवाह को पेश न करने के मामले में ₹2,000 का जुर्माना लगाया है।
अदालत के आदेश के अनुसार, इस राशि में से ₹1,500 वेलफेयर फंड में जमा करवाए जाएंगे, जबकि ₹500 की राशि आरोपी को दी जाएगी। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अगली पेशी तक यह राशि जमा नहीं करवाई गई, तो इसे राज्य सरकार की संपत्ति से वसूला जाएगा।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि मामले के महत्वपूर्ण गवाह विजेंद्र सिंह, जो कि पुलिस विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं, को बार-बार निर्देश देने के बावजूद अदालत में पेश नहीं किया जा रहा है। इस पर न्यायालय ने अभियोजन पक्ष की लापरवाही को गंभीर माना।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस तरह की लापरवाही से आरोपी के त्वरित न्याय पाने के अधिकार का हनन हो रहा है। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि यह मामला पिछले 12 वर्षों से लंबित है और कई बार आदेश देने के बावजूद गवाह को पेश नहीं किया गया, न ही इस संबंध में कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण दिया गया।
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न्यायालय ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि गवाहों की पेशी को लेकर गंभीरता आवश्यक है और भविष्य में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह आदेश पुलिस विभाग के लिए एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि न्यायिक प्रक्रिया में ढिलाई अब स्वीकार्य नहीं होगी।

