इस्लामाबाद में हुई वार्ता के असफल रहने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव खुलकर सामने आ गया है। दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है और हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि कूटनीतिक रास्ता और कठिन होता जा रहा है।
वार्ता खत्म, आरोप-प्रत्यारोप शुरू
वार्ता के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अब निर्णय ईरान को लेना है और अमेरिका अपनी ओर से अंतिम प्रस्ताव दे चुका है। उनके इस बयान के बाद ईरान ने सख्त प्रतिक्रिया दी।
टोक्यो स्थित ईरानी दूतावास ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो बात युद्ध के मैदान में हासिल नहीं हुई, उसे बातचीत की मेज पर भी नहीं पाया जा सकता। इस बयान को अमेरिका के प्रति सीधा संदेश माना जा रहा है।
‘आखिरी प्रस्ताव’ पर ईरान का पलटवार
अमेरिका द्वारा दिए गए ‘आखिरी और सबसे बेहतर प्रस्ताव’ को ईरान ने एकतरफा बताया। ईरानी पक्ष का कहना है कि किसी भी समझौते में दोनों पक्षों की सहमति जरूरी होती है, इसे दबाव बनाकर लागू नहीं किया जा सकता।
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ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी भी प्रकार के दबाव में निर्णय लेने वाला नहीं है और अपनी शर्तों पर ही आगे बढ़ेगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना नया विवाद
तनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि उसके युद्धपोत होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर चुके हैं और वहां सुरक्षा से जुड़े अभियान शुरू किए गए हैं।
हालांकि, ईरान ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में किसी भी गतिविधि पर उसका नियंत्रण है और अमेरिकी बयान वास्तविकता से परे है।
पाकिस्तान की सराहना, अमेरिका पर निशाना
ईरान ने वार्ता के आयोजन को लेकर पाकिस्तान की सराहना की, लेकिन साथ ही अमेरिकी बयानबाजी को गैर-जिम्मेदाराना बताया। खासतौर पर उन बयानों पर आपत्ति जताई गई जिनमें संभावित परिणामों को लेकर चेतावनी दी गई थी।
सीजफायर पर अनिश्चितता
वार्ता विफल होने के बाद सीजफायर को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। पहले से जारी तनाव के बीच अब यह सवाल उठने लगा है कि आने वाले समय में हालात किस दिशा में जाएंगे।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि दोनों पक्षों के बीच बातचीत का कोई नया रास्ता नहीं निकलता, तो क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।

